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LIFE IS SO GOOD Book Summary in Hindi

 LIFE IS SO GOOD Book Summary in Hindi by George Dawson and Richard Glaubman - Howdy guys, जॉर्ज डॉसन उन हज़ारों अफ्रीकन अमेरिकंस में से एक हैं जिन्होंने डिस्क्रिमिनेशन यानी रंग भेद जैसे बुरे दौर को बेहद करीब से एक्सपीरियंस किया है। हर कोई यह नहीं समझ सकता है कि एक ऐसी दुनिया में रहने पर कैसा  महसूस होता होगा, जहाँ उनके जैसे लोगों को पसंद नहीं किया जाता था, जहाँ उन्होंने बहुत गरीबी झेली है और उन्हें पढ़ने-लिखने तक का मौका नहीं मिल पाया था। लेकिन जॉर्ज की कहानी हमें उस दर्दनाक अनुभव की एक झलक दिखाती है और अपना अनुभव सभी के साथ बांटने के लिए हम उनके शुक्रगुज़ार हैं। यह समरी, आपको इस बात का एहसास करवाएगी कि उनके जैसे लोगों ने क्या-क्या सहा है,  क्यों सभी के साथ अच्छा से पेश आना बहुत ज़रूरी है और जिस स्कूल में हम जाने से कतराते हैं उसकी और  एजुकेशन की क्या अहमियत है।


इस समरी को किसे पढ़ना चाहिए?

* ऐसे स्टूडेंट्स जो एजुकेशन की वैल्यू नहीं समझते 
* यंग एडल्ट्स जो अभी लाइफ के शुरूआती स्टेज पर हैं और उन्हें इंस्पिरेशन की ज़रुरत है
* एडल्ट्स जिन्हें ये समझने की ज़रुरत है कि ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत है 
        
ऑथर के बारे में

जॉर्ज डॉसन एक ग़ुलाम के पोते थे जिन्होंने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर वक़्त काम करने में बिता दिया था  और 98 की उम्र में पढ़ना-लिखना  सीखा था। उन्होंने अपने जीवन में  कई अलग-अलग तरह के काम किए थे, जैसे - उन्होंने  घोड़ों को ट्रेन किया था, खेतों में, रेलरवे, लड़की के मिल में  और  एक डेयरी फैक्ट्री में भी काम किया था। रिटायरमेंट के बाद, जॉर्ज फुल-टाइम स्टूडेंट बन गए थे। रिचर्ड ग्लॉबमैन एलीमेंट्री स्कूल के टीचर हैं। उन्होंने ये  कहानी जॉर्ज डॉसन के साथ मिलकर लिखी है।

LIFE IS SO GOOD Book Summary in Hindi

इंट्रोडक्शन

103 साल के जॉर्ज डॉसन, एक गुलाम के पोते थे। उन्होंने 98 साल की उम्र में पढ़ना सीखा और इसी वजह से उन्हें दुनिया भर से कई लोग जानने लगे। कई लोगों ने उनसे इंस्पायर होकर अपनी एजुकेशन पूरी की, लेकिन रिचर्ड ग्लॉबमैन उनसे इतने इंस्पायर हुए कि उन्होंने जॉर्ज डॉसन की लाइफ के बारे में लिखने का फ़ैसला किया।

जॉर्ज का मिशन था अपनी कहानी बताना और दूसरों को उनकी लाइफ बेहतर बनाने के रास्ते ढूँढने में मदद करना और ऐसा हुआ भी। बहुत से लोग उनके और उनकी कहानी के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहते थे।

जॉर्ज की जिंदगी के बारे में जानकर रिचर्ड में भी बड़ा बदलाव आया था। जॉर्ज ने उनके साथ महीनों काम किया और उस वक़्त के दौरान रिचर्ड ने महसूस किया कि उनकी लाइफ में तो कुछ भी नहीं है। जल्द ही, रिचर्ड एक ऐसे इंसान बन गए थे जो अपनी ज़िंदगी के प्रति आभारी थे।

इस समरी में, आप जॉर्ज की लाइफ और उनके संघर्ष के बारे में जानेंगे और ये भी जानेंगे कि 98 साल की उम्र में उन्होंने पढ़ना क्यों सीखा।

‘लाइफ इज़ सो गुड’ जॉर्ज डॉसन की बायोग्राफी है, जिसे रिचर्ड ग्लौबमैन ने लिखा है। यह एक ऐसी समरी है जो आपको यह समझने के लिए इंस्पायर करेगी कि भले ही लाइफ कितने भी संघर्षों से भरी हो लेकिन फिर भी बहुत अच्छी होती है, बिल्कुल उसी तरह जैसे जॉर्ज ने अपना लाइफ जी है।

Chapters 1 – 6

जॉर्ज डॉसन टेक्सस के मार्शल में पले-बड़े थे। वह चार साल के थे, जब फैमिली की मदद करने के लिए उन्होंने अपने फार्म में काम करना शुरू कर दिया था। एक दिन उनके पिता उन्हें शहर ले गए। सूरज अभी निकला भी निकला था और उनके भाई-बहन सो रहे थे। जॉर्ज बहुत excited थे क्योंकि पहली बार वो और उनके पिता एक साथ शहर जा रहे थे। उन्हें गर्व होने के साथ साथ ऐसा लग रहा था जैसे वो बड़े हो गए हों।

शहर में गन्ने का सिरप डिलीवर करने के लिए जाते वक़्त जॉर्ज के पिता अपने मौजूदा हालात के लिए भगवान् का शुक्रिया अदा कर रहे थे। उनके पिता ने कहा था कि उनकी ज़िंदगी अच्छी चल रही है क्योंकि इस सिरप को बेचने से उनका सारा क़र्ज़ उतर जाएगा और भगवान का शुक्र है कि उनके परिवार में कोई बीमार भी नहीं था। जॉर्ज खुश थे कि उनके पिता उनसे एक बड़े आदमी की तरह बात कर रहे थे और वह उनकी फैमिली का कितना ख़याल रखते थे। जॉर्ज ऐसा पिता पाकर ख़ुद को खुशकिस्मत मान रहे थे लेकिन जॉर्ज इस बात को उनके सामने कह नहीं पाते थे।

जॉर्ज का आज अचानक से फील हो रहा था जैसे वो बड़े हो गए हैं और इसी ख़ुशी में वो एक दुकान से टॉफी खरीद रहे थे कि तभी उन्हें दुकान के बाहर शोरगुल सुनाई दिया। उन्होंने देखा कि जॉर्ज के दोस्त, पीट को कुछ गोरे लोग घसीटकर ले जा रहे थे। वह उनसे उसे छोड़ देने के लिए भीख मांग रहा था और कहे जा रहा था कि उस पर जो आरोप लगाया गया है वो सरासर झूठा है। जब जॉर्ज को पता चला कि पीट पर एक गोरी लड़की के साथ रेप करने का आरोप लगाया गया है तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। जॉर्ज जानते थे कि पीट ऐसा घिनौना काम कभी नहीं कर सकता था क्योंकि उसने जॉर्ज के साथ हमेशा बहुत सभ्य और दया के साथ बर्ताव किया था।

जॉर्ज, पीट और उसकी बेगुनाही के साथ खड़े रहना चाहते थे, लेकिन उनके कुछ कहने से पहले ही उनके पिता ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने अपने पिता की तरफ देखा और वह समझ गए थे कि उन्हें अपने पिता की बात माननी चाहिए और वह था चुप रहना।

पीट को ओक के पेड़ तक घसीटकर ले जाया गया। वह उनसे उसे छोड़ देने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन उन गोरे लोगों ने उसकी एक न सुनी और उसके गली में फंदा डालकर उसे पेड़ पर लटका दिया। जल्द ही पीट ने हरकत करना बंद कर दिया और उसका बेजान शरीर पेड़ से लटका रहा, जैसे कि वो एक चेतावनी था उन लोगों के लिए जो गोर नहीं थे।

उस शहर से लौटते समय जॉर्ज पीट के शरीर को निहारते रहे। गोरे लोगों ने पीट के साथ जो किया था उसे सोचकर जॉर्ज बेहद गुस्से से भर गए थे। उन्होंने कहा कि वो कभी किसी गोरे इंसान से बात नहीं करेंगे। लेकिन, उनके पिता ने उन्हें समझाया कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि कुछ गोरे लोग ज़रूर बुरे और मतलबी थे, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जो ख़ुद डरे हुए थे और कुछ नहीं कर सकते थे। इसलिए हमें कभी दूसरे लोगों को जज नहीं करना चाहिए।

यहीं से जॉर्ज को अपनी लाइफ के बारे में अहसास होने लगा। जॉर्ज ने महसूस किया कि वे एक अनफेयर सिचुएशन का सामना कर रहे थे और सुकून भरी लाइफ जीने के लिए शांत रहना ज़रूरी है। उन्होंने अपने पिता को गले लगाया और उनके आँसू छलक पड़े। उनके पिता ने कहा कि आज का दिन शुरू होने पर वो एक नादान बच्चे थे लेकिन अब जीवन का कड़वा सच देखकर वो बड़े बनना सीखेंगे।

छह महीने बाद, पीट पर रेप का आरोप लगाने वाली गोरी लड़की ने एक गोरे बच्चे को जन्म दिया और किसी ने कुछ नहीं कहा। गोरे लोगों में से किसी ने भी फिर कभी पीट के बारे में बात नहीं की, लेकिन जॉर्ज उस दिन को कभी नहीं भुला पाए जब उन्होंने उनके दोस्त को मार डाला था।

जॉर्ज को उनके फार्म पर अलग अलग काम दिए गए थे। लेकिन उनका पसंदीदा काम था अपनी दादी और परदादी के साथ रुई की छटाई करना। उन्हें उनके साथ समय बिताना बहुत पसंद था क्योंकि इस दौरान वो उन्हें कई कहानियाँ सुनाया करती थीं।

इन कहानियों में से जॉर्ज को सबसे ज़्यादा पसंद गुलामी और फ़िर उससे आजादी से जुड़े किस्से लगते थे।
एक दिन, उनकी परदादी सिल्वी और उनकी बेटी चैरिटी मिसिसिपी में एक खेत में थीं जब उन्हें ख़बर मिली प्रेसिडेंट लिंकन ने गुलामी की प्रथा को ख़त्म कर दिया है। ये सुनकर सभी गुलाम ख़ुशी से झूम उठे और आगे की योजना बनने लगे कि उन्हें कहाँ जाना चाहिए, वो तो ये सोच रहे थे कि चाहे कोई भी जगह हो लेकिन वो मिसिसिपी से तो बेहतर ही होगी। लेकिन, सिल्वी और चैरिटी वहां से नहीं गए क्योंकि वे अभी भी रेगी का इंतज़ार कर रहे थे। वह सिल्वी के पति थे, जिनके बारे में बताया जाता है कि वो यूनियन आर्मी में आज़ादी के लिए जंग लड़ने के दो साल बाद शहीद हो गए थे।

इस बारे में उन्हें रेगी के दोस्त टॉम डॉसन से पता चला, जो जंग में उनके साथ लड़ रहे थे और उनकी तलाश में निकले थे। सिल्वी और चैरिटी भी उस जगह से निकलना चाहते थे लेकिन अपने क़र्ज़ की वजह से उन्हें आठ साल तक वहीँ काम करना पड़ा।

बाद में, टॉम डॉसन ने चैरिटी से शादी कर ली और उन्हें पता चला कि मार्शल, टेक्सस में करने के लिए कई काम हैं। सिल्वी, चैरिटी, टॉम डॉसन और जॉर्ज के पिता टेक्सस में 40 एकड़ ज़मीन और एक खच्चर के साथ रहने लगे, जो गुलामी से मुक्त हो जाने के बाद उनका अधिकार था।

और इस तरह जॉर्ज का परिवार टेक्सस के मार्शल में बस गया। उन्होंने अपनी दादी से ये कहानी ना जाने कितनी बार सुनी थी, लेकिन वह इससे कभी बोर नहीं होते थे। जॉर्ज को यह सुनकर बहुत अच्छा लगता था कि कैसे उनका परिवार कभी गुलाम हुआ करता था जिन्होंने अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष किया और आज वो पूरी आज़ादी के साथ अपने फार्म में रहते हैं। उनके फार्म में एक किचन, तीन छोटे कमरे और रुई को स्टोर करने के लिए पीछे एक कमरा भी था।

जॉर्ज जानते थे कि वे अमीर नहीं थे क्योंकि उनके पास कुछ भी नहीं था, लेकिन उनकी फैमिली से किसी ने भी उन्हें कभी नहीं कहा था कि वे गरीब हैं। जॉर्ज के लिए, उनके परिवार का साथ ही उनके लिए सब कुछ था और जॉर्ज जानते थे कि अपने पेरेंट्स की तरह उन्हें भी अपनी फैमिली के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए क्योंकि वह पांच बच्चों में सबसे बड़े थे, इसलिए उन्हें पता था कि उनका जिम्मेदारी लेना कितना ज़रूरी है।

सर्दियों के दौरान, जब जॉर्ज की फैमिली के लिए खाना कम पड़ जाता था तो उनके पेरेंट्स उन्हें कोल्स के खेत में काम करने के लिए भेज देते थे। कोल्स गोर लोगों का परिवार था, लेकिन वे जॉर्ज के साथ अच्छे से पेश आते थे और काम शुरू करने से पहले उन्हें खाना और दूध भी देते थे।

जब खेत का काम पूरा हो जाता तो कोल्स के बच्चे, जिमी, जॉनी और एडेन, जॉर्ज के साथ खेलने लगते। ये बच्चे अभी छोटे और मासूम थे और समाज में फैले गोर और काले के भेदभाव से अनजान थे।

घर लौटने पर जॉर्ज अपने माता-पिता को बताते कि उन्होंने कोल्स के बच्चों के साथ कितना खेला और मज़ा किया। किसी भी बच्चे के लिए ये आम बात होती है, लेकिन जॉर्ज के माता-पिता चाहते थे कि वो उनके साथ ना खेलें क्योंकि जॉर्ज ऐसे खेलकर पैसे नहीं कमा सकते थे।

जॉर्ज जब 8 साल के हुए तब उनका कोल्स के बच्चों के साथ खेलना बंद हो गया था क्योंकि अब वे स्कूल जाने लगे थे। ये वो उम्र भी थी जब गोर बच्चे सिर्फ अपने जैसे रंग के बच्चों के साथ ही रहना शुरू कर देते थे। जॉर्ज के लिए ये सही भी था क्योंकि अब आठ साल की उम्र के बच्चों के साथ खेलने के लिए काफी बड़े हो गए थे और इसलिए उन्होंने दूसरे गोर परिवार के फार्म में फुल टाइम जॉब शुरू कर दी। अब उनका पूरा ध्यान अपनी फैमिली के लिए पैसा कमाने पर था। जॉर्ज अपने छोटे भाइ बहनों का पेट भरने में अपने पेरेंट्स की मदद करना चाहते थे और सबसे बड़े होने के नाते वह हमेशा उनके काम आना चाहते थे।

Chapters 7 – 8

1914 में, जब जॉर्ज सोलह साल के थे और लिटिल परिवार के फार्म में काम कर रहे थे, तब एक दिन अचानक उनके पिता आए और उन्होंने मिस्टर और मिसिज़ लिटिल से बात की। उनके पिता वहां जॉर्ज को लेने के लिए आए थे क्योंकि उनके अंकल और आंटी गुज़र गए थे और उनका उनके फार्म पर होना ज़रूरी था।

उनके कज़िन्स जॉर्ज की फैमिली के साथ रहने लगे थे और इतने लोग होने की वजह से अब ज़्यादा कमाने और ज़्यादा अनाज उगाने की ज़रुरत थी। जॉर्ज को शहर में लकड़ी काटने के मिल में दूसरी नौकरी भी मिल गई थी। यहाँ पैसा तो अच्छा नहीं मिलता था, लेकिन कुछ ना कमाने से तो ये कहीं बेहतर था।

उनके पिता ही उनकी कमाई का हिसाब-किताब रखते थे। वह उनकी सैलरी का एक हिस्सा जॉर्ज के लिए और बाकी परिवार के लिए भी बचाते भी थे। जॉर्ज ने अपने कज़िन्स को कभी दूर का रिश्तेदार नहीं माना, उनके लिए वो उनके भाई-बहन ही थे। इसलिए उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि उनके अपने भाई-बहनों की तरह उनका फ्यूचर भी अच्छा हो। जॉर्ज पढ़ना- लिखना सीखना चाहता थे, लेकिन सोलह साल के हो गए थे तो उन्होंने सोचा कि अब नौकरी करना ही बेहतर होगा क्योंकि इससे वह अपने परिवार की मदद कर सकते थे।

खाली वक़्त में, जॉर्ज अपनी बिरादरी के लोगों के साथ बेसबॉल खेलते थे। कई बार वे दूसरे शहरों की बेसबॉल टीमों के साथ कम्पटीशन भी करते थे। ज्यादातर वक़्त, वे अपनी ही बिरादरी लोगों के खिलाफ खेलते थे, लेकिन कई बार ऐसा भी होता था, जब वो गोर लोगों के साथ कम्पटीशन करते थे।

गोर लोगों की बेसबॉल टीम को सपोर्ट करने वाली जनता अक्सर उन पर अंडे फेंकती थी और उनकी टीम को भला-बुरा भी कहती थी लेकिन जॉर्ज और उनकी टीम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। इसके बजाय, इससे उन्हें जीतने के लिए और भी जोश मिलता था। जब वे गोरों को हरा देते थे तो भी भीड़ गुस्सा हो जाती थी, लेकिन जॉर्ज और उनकी टीम इसकी परवाह नहीं करते थे क्योंकि वो जानते थे कि वो जीत के हकदार थे।

दूसरी बेसबॉल टीमों के साथ कम्पटीशन करने के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना इतना आसान नहीं था। जॉर्ज और उनकी टीम को कई घंटे सिर्फ बाथरूम ढूँढने में लग जाते थे क्योंकि ज़्यादातर गैस स्टेशन में काले लोगों के लिए बाथरूम नहीं होते थे। उन्हें कई-कई घंटे तक भूखा भी रहना पड़ता था क्योंकि कई होटल काले लोगों को खाना नहीं देते थे, लेकिन कुछ होटल उन्हें सैंडविच बेचने के लिए तैयार हो जाते थे और पीछे के दरवाज़े से उन्हें खाना दे देते थे। जॉर्ज और उनकी टीम के पास कोई चारा भी नहीं था, एक तो वो घर से दूर रास्ते पर थे और भूख से बेहाल भी थे।

जब जॉर्ज बेसबॉल नहीं खेलते थे तब मिल में काम करते रहते थे। उन्होंने 19 साल की उम्र तक वहां काम किया। 1917 में, फर्स्ट वर्ल्ड वॉर शुरू होने की खबर आई और कई लोगों को आर्मी में भारती किया जाने लगा। जॉर्ज भी उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें भी चुना जाएगा क्योंकि मिल के ज़्यादातर वर्कर्स देश की सेवा करने के लिए चले गए थे, लेकिन जॉर्ज नहीं जा पाए क्योंकि उस मिल के मालिक ने कहा कि उसे जॉर्ज जैसे अच्छे वर्कर की ज़रूरत है। उसने चालाकी से फाइल में उनकी उम्र ही बदल दी और कहा कि वह आर्मी जॉइन करने के लिए अभी बहुत छोटे हैं।

जॉर्ज और दो साल तक मिल में काम करते रहे। जब वह 21 साल के हुए तो उनके पिता ने कहा कि वह अब बड़े हो गए हैं और उन्हें अपने दम पर रहना चाहिए। उनके पिता हमेशा उनकी सैलरी का हिसाब-किताब रखते थे, लेकिन जब वह 21 के हुए तो उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी जॉर्ज को सौंप दी। उन्होंने कहा कि अपने परिवार के लिए जॉर्ज ने बहुत काम कर लिया और अब उन्हें बस ख़ुद पर फोकस करना चाहिए।

जॉर्ज के दिमाग में सबसे पहली बात दूसरी जगहों को देखने की आई। उन्हें ये आईडिया इसलिए आया था क्योंकि वह अपने मिल के एक साथी से मिले थे, जो जंग में शामिल हुआ था और अब टेक्सस लौट आया था। उसने बताया था कि टेक्सस के बाहर ऐसी जगहें हैं जहां लोगों के साथ रंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता था । ये बात जॉर्ज के ज़ेहन में घर कर गई और उनमें दूसरी जगहों पर जाने की इच्छा जागने लगी और यहीं से उनके सफ़र की शुरुआत हुई।

Chapters 11 - 13

जॉर्ज दो साल तक टेनेसी में रहे। उनका ज्यादातर पैसा खाने और ट्रेन के टिकट पर खर्च हो जाता था। एक दिन, जब जॉर्ज ने मिसिसिपी नदी के किनारे दीवार बनाने की जॉब देखी तो वह तुरंत उसमें शामिल हो गए। अगर जॉर्ज के पास खच्चर होता तो उनकी सैलरी ज़्यादा हो सकती थी, लेकिन उनके पास खच्चर नहीं था क्योंकि वह एक ट्रैवलर थे।

वहाँ के मैनेजर ने जॉर्ज को काम करने के लिए एक खच्चर दिया तो था लेकिन उनकी सैलरी ज़्यादा नहीं थी। यह अभी भी जॉर्ज के लिए काफ़ी था क्योंकि वहाँ उन्हें फ्री खाना और आराम करने के लिए एक केबिन मिल जाता था। वहाँ उनकी मुलाक़ात कई काले लोगों से हुई जो बहुत दूर से आए थे। लेकिन, ये लोग जॉर्ज से अलग थे क्योंकि ये अपने परिवार का पेट भरने के लिए रोज़गार की तलाश में आए थे जबकि जॉर्ज एक मुसाफिर थे जो अलग-अलग जगहों के सफ़र पर निकले थे।

1923 में जॉर्ज मार्शल वापस लौटे तो देखा कि वहां के हालात अभी भी वैसे के वैसे थे। जो कैंडी वो अपने भाई-बहनों के लिए लाए थे, वो उन्हें बहुत पसंद आई। जॉर्ज अपनी माँ के लिए एक ड्रेस भी लाए थे, जिसे लेने में वो हिचकिचा रही थीं क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि जॉर्ज अपना पैसा ऐसी चीज़ों पर खर्च करें। उनकी माँ चाहती थीं कि वह अपने पैसे बचाएँ या खुद पर खर्च करें, लेकिन जब जॉर्ज ने कहा कि यह उनके लिए तोहफ़ा था जो वो बड़े मन से उनके लिए लेकर आए थे तो उनकी माँ ने मुस्कुराते हुए ड्रेस ले ली।

इसके बाद, जॉर्ज अपने खेत पर गए और उनका काम ना होने के बावजूद वहाँ हाथ बंटाने लगे। जब जॉर्ज रुई बेचने के लिए शहर गए तो उन्होंने पहली बार एक कार को करीब से देखा। कार का सेल्समैन दुकान के मालिक को कार बेचने के लिए आया था लेकिन वो वहां था नहीं। सेल्समैन ने जॉर्ज से पूछा कि उसे अपनी कार के लिए थोड़ा पानी चाहिए तो वो कहाँ से मिल सकता है, तब जॉर्ज ने उसकी मदद की. उस सेल्समैन ने उन्हें पैसे देने की कोशिश की तो जॉर्ज ने कहा कि इसकी कोई ज़रुरत नहीं है।

सेल्समैन ने उनकी मदद और दया के लिए उनकी तारीफ़ की और पुछा कि क्या जॉर्ज कार चलाना चाहते हैं। पहले तो जॉर्ज झिझक रहे थे लेकिन फिर उन्होंने कोशिश की। यह पहली बार था जब उन्होंने कार चलाई थी और वह कार चलाने वाले डॉसन फैमिली के पहले इंसान थे। सेल्समैन पैसेंजर सीट पर बैठकर उन्हें कार चलाना सिखा रहा था। वहाँ मौजूद सभी लोग उन्हें देख रहे थे और यही तो सेल्समैन चाहता था। उसने जॉर्ज से कहा कि जब दूसरे लोग किसी को कार चलाते हुए देखेंगे तो वो उसे खरीदने के लिए मोटीवेट होंगे।

घर पहुँचने पर जॉर्ज ने अपनी फैमिली को अपने एक्सपीरियंस के बारे में बताया, जिसे सुनकर वे सभी हैरान हो गए थे, खासकर उनके पिता। इसके बाद, उनकी माँ ने कहा कि वे जानते हैं कि वह ज़्यादा वक़्त तक घर में नहीं रुकेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने जॉर्ज में कुछ अलग नोटिस किया है, लेकिन अभी भी उनमें कुछ कमी थी और उन्हें अलग-अलग जगहों को एक्सप्लोर करते रहना चाहिए क्योंकि वह जानती थीं कि वह खुद भी ऐसा ही चाहते थे। जॉर्ज ने इस बारे में सोचा और मान गए। उनकी माँ ने कहा कि जब भी उनका मन करे वो घर आ सकते हैं।

इसके बाद, जॉर्ज ह्यूस्टन और ब्राउन्सविले, टेक्सस गए। आखिर में, वह मेक्सिको के एक छोटे से शहर में पहुंचे। जब वो ट्रेन से उतरे तो उन्हें ज़ोरों की प्यास लगी थी लेकिन उन्हें पता नहीं था कि काले लोगों के लिए पानी का नल कहाँ है। उन्होंने ट्रेन से उतरने वाले लोगों से पूछा तो सभी ने एक नल की तरफ इशारा किया। जॉर्ज लाइन में लग गए, लेकिन फ़िर उन्हें पता चला कि पानी पीने के लिए उन्हें एक कप लाना होगा।

उनके पीछे वाले इंसान ने जब इस बात को नोटिस किया तो उन्होंने अपना कप जॉर्ज को ऑफर किया। ये देखकर जॉर्ज बहुत कंफ्यूज़ हो गए। जो इंसान उन्हें कप ऑफर कर रहा था, वह काला नहीं था। वह थोड़ा सांवला था लेकिन फ़िर भी एक गोरा ही था। जॉर्ज ने उससे पूछा कि सिर्फ एक कप ही क्यों है तो वो इंसान उनकी बात का मतलब नहीं समझ पाया। उस आदमी ने सिर्फ एक कप होने के लिए माफी मांगी और कहा कि उन्हें इसे ही शेयर करना होगा। ये सुनकर जॉर्ज हँस पड़े क्योंकि कोई भी गोरा उनके साथ एक कप शेयर करने के लिए कभी राज़ी नहीं होता, लेकिन वह उस आदमी का अपमान नहीं करना चाहता थे तो जॉर्ज ने उसका कप इस्तेमाल कर पानी पिया और उन्हें वापस कर दिया।

पानी पीने के बाद, jorge नाम का वो गोरा, जिसका नाम जॉर्ज से मिलता-जुलता था लेकिन वो स्पेनिश था, उनके साथ खाने के लिए एक रेस्टोरेंट में गया। जब जॉर्ज अंदर गए तो वो इसी कशमकश में थे कि कि उन्हें वहाँ बैठने की इजाज़त है भी या नहीं। वो नहीं जानते थे कि वहाँ उनके जैसे काले लोगों को खाना सर्व किया जाता है या नहीं, लेकिन फ़िर उन्होंने देखा कि एक वेट्रेस उन दोनों के लिए टेबल लगा रही थी।

जॉर्ज, Jorge के बगल में बैठे थे और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वो एक गोर के साथ बैठे थे। उन्होंने देखा कि यह जगह सच में मार्शल, टेक्सस से अलग थी। Jorge भी उन्हीं की तरह एक labor यानी मज़दूर थे। उसने जॉर्ज को बताया कि उनके गांव के पास एक कॉफी बगान में काम करने के लिए लोग चाहिए, लेकिन वहां सैलरी कम थी। उनकी फैमिली के पास एक फार्म भी था, जहाँ जॉर्ज खाने और रहने के लिए जगह के बदले में उनकी मदद कर सकते थे। जॉर्ज इस बात के लिए सहमत हो गए।

उन्होंने मेक्सिको में रहने के बारे में सोचा। वो गाँव काफी गरीब था, फिर भी जॉर्ज के साथ गाँव के गोर लोग कभी भेदभाव नहीं करते थे। वो वहाँ शादी कर ख़ुद का परिवार शुरू कर सकते थे। फ़िर भी, टेक्सस अभी भी उनके लिए घर था, भले ही वहाँ कई लोग काले लोगों को पसंद नहीं करते थे।

कुछ समय बाद, जॉर्ज टेक्सस लौट आए और उनके फार्म में मदद करने लगे। उनके पेरेंट्स ने उन्हें मदद करने के लिए नहीं कहा था लेकिन उन्हें वहां काम करना अच्छा लगता था। दिन बीतते गए और जॉर्ज को एहसास हुआ कि वह अभी टेक्सस में रहने के लिए तैयार नहीं थे। तो वो रेलवे स्टेशन चले गए एक ऐसी जगह जाने के लिए जहाँ वह पहले कभी नहीं गए थे।

क्लीवलैंड जाने वाली ट्रेन में जॉर्ज की मुलाकात एक काले इंसान से हुई। उन्होंने देखा कि वह आदमी अकेला बैठा था। उन्होंने उस आदमी के पास जाकर अपना इंट्रोडक्शन दिया। जॉर्ज ने महसूस किया कि जब वह टेक्सस में थे, तब उनमें इतना कॉन्फिडेंस कभी नहीं था। नई जगह घूमने से उनमें बहुत बदलाव आ गया था।

ट्रेन सेंट लुइस में रुकी। जॉर्ज और आर्टिस, जिससे उनकी मुलाक़ात ट्रेन में हुई थी, एक कैफे ढूँढने लगे। उन्हें कैफ़े ढूँढने में मुश्किल हो रही थी क्योंकि वहाँ के ज़्यादातर कैफे के बाहर बोर्ड पर लिखा था कि वो सिर्फ गोर लोगों को खाना सर्व करते हैं।

जब उन्हें एक ऐसा कैफे मिला जो सभी लोगों को वेलकम करता था तो जॉर्ज ने मेनू लिया और नाटक करने लगे कि वह पढ़ना-लिखना जानते थे। वहाँ ऑर्डर आर्टिस दिया और जॉर्ज ने कहा कि वो भी वही खाएंगे, बस वो कॉफी के बजाय हॉट चॉकलेट लेना चाहते थे।

वहाँ खाने के बाद, जॉर्ज के पास ज़्यादा पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने क्लीवलैंड जाने के लिए टिकट पहले ही खरीद लिया था, लेकिन उनकी प्रॉब्लम थी रास्ते के लिए खाने का इंतज़ाम करना। इसलिए जॉर्ज ने काम ढूँढने के लिए कुछ वक़्त सेंट लुइस में रहने का फैसला किया।

शहर में घूमते हुए उन्होंने एक गोर और एक काले लेबर के बीच बातचीत सुनी। वे एक ऐसे आदमी के बारे में बात कर रहे थे जो काम पर नहीं आया था और अब उनके पास वर्कर्स की कमी थी। उन्होंने जॉर्ज को देखा तो उनसे पूछा कि क्या उन्हें नौकरी चाहिए तो उन्होंने तुरंत हाँ कह दिया।

जॉर्ज का काम था लकड़ी के बक्से उठाना। इस काम के लिए, उन्हें फ्री खाने के साथ एक दिन का एक डॉलर मिलता था। वो कुछ दिनों के लिए ही सेंट लुइस में रहे ताकि क्लीवलैंड के ट्रिप के लिए पैसे जुटा सकें।

Chapters 16 - 18

जॉर्ज की क्लीवलैंड ट्रिप उनके प्लान के हिसाब से नहीं हुई। उन्हें पता चला कि जो टिकट उनके पास था वो मार्शल वापस जाने वाला टिकट था, तो उन्होंने Canada जाने का फैसला किया क्योंकि वह बर्फ देखना चाहते थे।

जॉर्ज ने Canada में सडबरी और कैलगरी में कुछ वक़्त बिताया। फिर वह बैंफ (Banff) पहुंचे। एक कैफे में उनकी मुलाक़ात कुछ लोगों से हुई जिन्होंने उनसे पूछा कि वह कहां से हैं। जॉर्ज ने जवाब दिया कि वह टेक्सस से हैं और कैनेडा में बर्फ देखने जा रहे थे। ये सुनकर वो लोग उनकी मदद करने के लिए तुरंत राज़ी हो गए। खाने के बाद, जॉर्ज उनके ट्रक में बैठ गए और वे जंगल के किनारे रुके।

जॉर्ज ने ज़िंदगी में पहली बार बर्फ देखी थी। वो बर्फ़ पर दौड़ने और कूदने लगे । थोड़ी देर बाद, उनके हाथ और पैर में दर्द होने लगा और उन्हें बहुत ठंड लग रही थी। उन्होंने सोचा कि टेक्सस Canada से कितना अलग था और बर्फ में यूँ ठिठुरने के बजाय सांप को ढूँढना ज़्यादा दिलचस्प होगा।

1928 में, जॉर्ज ने फैसला किया कि अब उनका घर जाने का वक़्त आ गया है। उनके पास टेक्सस वापस जाने का टिकट था इसलिए उन्होंने साउथ की तरफ जाने वाली एक ट्रेन पकड़ी। वह कैलिफ़ोर्निया से निकले, जहाँ वह फिशिंग करने के लिए रुके और डल्लास के कई शहरों से भी गुज़रे।

जब जॉर्ज मार्शल पहुंचे तो उनकी आंटी ने उन्हें बताया कि उनकी फैमिली कॉफमैन, टेक्सस में बसने चली गई हैं। उन्हें पता चला कि उनकी फैमिली को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और उनके पिता ने नई नौकरी ज्वाइन कर ली है। जॉर्ज अगले दिन की ट्रेन से कॉफ़मैन पहुंचे। जॉर्ज के पेरेंट्स को उम्मीद नहीं थी कि वह वापस आएँगे। जॉर्ज ने अपने भाई-बहनों को देखा, जो अब बड़े हो गए थे. उन्होंने अपनी माँ को एक ड्रेस दी, जो उन्होंने कैलिफोर्निया में खरीदी थी।

जॉर्ज ने अपने माता-पिता के घर के पास एक घर लिया और रेलवे में नौकरी करने लगे। जब उनके पास खाली वक़्त होता तो वे घोड़ों की सवारी के लिए उन्हें ट्रेनिंग देते थे। एक दिन, एल्ज़ेनिया नाम की एक औरत ने उन्हें देखा तो कहा कि ऐसी नौकरी करना बेवकूफी है। ये कहना गलत नहीं होगा कि जॉर्ज को वो पहली नज़र में भा गई थी। कुछ वक़्त बाद, एल्ज़ेनिया और जॉर्ज ने शादी कर ली और डल्लास में बस गए। एक साल बाद, उनके घर अमेलिया पैदा हुई जो उनके सात बच्चों में सबसे बड़ी थी।

हालाँकि उनके कई बच्चे थे, लेकिन जॉर्ज और एल्ज़ेनिया ने उन्हें अच्छे से पाला-पोसा था और अच्छे संस्कार सिखाए थे। उन सभी ने कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। जॉर्ज उन्हें वो सब कुछ सिखाना चाहते थे जो उन्होंने अपने पिता से सीखा था। उनके बच्चे जिस दौर में बड़े हुए थे, उस वक़्त भी गोर और काले लोगों में भेदभाव किया जाता था। जॉर्ज ने उन्हें समझाया कि रूल्स तोड़ने का ख़तरा तो हमेशा बना रहेगा, इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को दुनिया में सबके साथ मिल-जुलकर जीने की सीख दी।

1938 में, जॉर्ज को ओक्स फार्म डेयरी में दूसरी नौकरी मिली। वह 1963 में अपने रिटायरमेंट तक वहीं काम करते रहे । जॉर्ज अब 65 के हो गए थे और लोग उनसे कहते थे कि गवर्नमेंट के नियम के हिसाब से वो काम करने के लिए बहुत बूढ़े हो चुके हैं। ओक्स फार्म डेयरी छोड़ने से पहले, उन्हें रिटायरमेंट प्लान के लिए कुछ ऑप्शन दिए गए जो था कि वो या तो हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट का ले सकते थे या एक बार में lumpsum पैसा ले सकते थे।

उन्होंने 1800 डॉलर का वन टाइम कैश पेमेंट चुना, लेकिन बाद में उन्हें लगने लगा कि उन्हें ज़िंदगी भर के मंथली चेक का ऑप्शन चुनना चाहिए था। इससे उन्हें बहुत मदद मिलती, लेकिन जॉर्ज को हर महीने सोशल सिक्यूरिटी का चेक मिलता था और ये उनके लिए काफी था।

Chapters 20 - 21

जॉर्ज फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में हिस्सा नहीं ले पाए थे क्योंकि उस समय उस मिल के मालिक ने उनकी उम्र बदलकर उन्हें एक बच्चा बता दिया था। जब दूसरा वर्ल्ड वॉर हुआ तो वह जंग में शामिल नहीं हो सकते थे क्योंकि वो बहुत बूढ़े हो चुके थे। इस जंग के कारण अमेरिका में कई जॉब के लिए अब लोगों की ज़रुरत पड़ने लगी क्योंकि ज़्यादातर लोगों को आर्मी में भर्ती करवा दिया गया था। जॉर्ज को पता चला कि कैलिफोर्निया में अच्छी सैलरी वाली जॉब की पोजीशन ख़ाली है, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें जाने नहीं दिया। उसकी पत्नी को लगा कि जॉर्ज के लिए यह बहुत खतरनाक हो सकता है।

जॉर्ज पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे लेकिन दुनिया में क्या चल रहा था वो इस बात से वाकिफ़ थे। उस वक़्त जॉर्ज के पास एक रेडियो था जिसकी मदद से वह जान पाते थे कि हिटलर कैसे-कैसे निर्दयी गलत काम कर रहा था। वह अक्सर सोचते कि हिटलर इतना मतलबी क्यों था लेकिन फ़िर उन्हें लगता था कि शायद हिटलर एक पागल आदमी है।

जूनियर, जॉर्ज का सबसे बड़ा बेटा था जिसे कोरियाई वॉर के लिए सेना में भर्ती किया गया था और वो तीन साल तक अपने घर से दूर था। वहाँ से लौटने पर जूनियर ने बताया था कि वहाँ उनका जीवन आसान नहीं था। सेना में दुनिया भर से आए कई अलग अलग लोगों से मिला था। एक तरफ तो वो एक दूसरे से बहुत अलग थे, लेकिन वो सभी एक साथ लड़ और एक मकसद के लिए लड़ रहे थे और उन लोगों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। लेकिन जब जूनियर घर आता था तो वो गोर लोगों के बीच नहीं बैठ सकता था। यहाँ उसे फ़िर से रंग भेद का सामना करना पड़ता था। जूनियर ने देश के लिए जो कुछ किया, उसके बाद अगर उसके साथ ऐसा बर्ताव हो रहा था तो इस बात से जॉर्ज को जूनियर के लिए बहुत बुरा लगता था। लेकिन उन्होंने जूनियर को समझाया कि ये सब ऐसे ही चलेगा। यही जीवन है और उन्हें बस चीज़ें जैसी हैं उसी के हिसाब से एडजस्ट करके जीना होगा।

1960 के दशक के आखिर तक, जॉर्ज रिटायर हो गए थे और अपनी दूसरी पत्नी के साथ दूसरे घर में रहने लगे थे। उनके बच्चे अब बड़े हो गए थे और अपने पैरों पर खड़े हो चुके थे। उनकी पहली पत्नी एल्ज़ेनिया गुज़र चुकी थी।
जॉर्ज अपनी पहली पत्नी एल्ज़ेनिया को छोड़कर, बाकी तीनों से चर्च में मिले थे। जी हाँ, उनकी चार बार शादी हुई थी और वह अपनी सभी पत्नियों से ज़्यादा जीए थे। जॉर्ज अपनी सभी पत्नियों के लिए अच्छे पति रहे थे और उन्होंने उनका अंतिम संस्कार भी अच्छे से किया था, जिस वजह से उनके पास अपने पेंशन के पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने अपनी सभी पत्नियों के साथ हमेशा अच्छा व्यवहार किया था और उनका बहुत ख़याल रखते थे। जॉर्ज से कई औरतें शादी करना चाहती थीं क्योंकि वह जानती थीं कि वो औरतों के साथ कितने अच्छे से पेश आते थे और वह अपनी हर पत्नी के प्रति वफादार भी रहे थे।

जॉर्ज अपना ख़ुद का घर बनाना चाहते थे। यह उनका पहला नया घर होता। इसके लिए उनके पास बहुत सामान था, लेकिन उनकी एक बेटी को कैंसर हो गया था और उसके पास इलाज के लिए पैसा नहीं था इसलिए जॉर्ज ने अपनी बेटी की मदद करने के लिए वो ज़मीन और सारा सामान बेच दिया. लेकिन अफ़सोस कि कैंसर ने उनकी बेटी को अपने गिरफ़्त में जकड़ लिया था और उसने कुछ समय बाद दम तोड़ दिया फिर भी, वह नहीं बच पाई। अपनी बेटी को अलविदा कहना जॉर्ज के जीवन का सबसे दुखद और दर्दनाक पल था।

उनके लगभग सभी बच्चे डल्लास में रहते थे। यही वो जगह थी जहाँ वो अपनी पहली बीवी के साथ रहा करते थे और इत्तेफ़ाक से ये वो जगह भी थी जहाँ उनकी आखिरी पत्नी ने आखिरी सांस ली थी। इसलिए, देखा जाए तो वो उन्हें यहाँ अकेलापन महसूस नहीं होता था। बचपन की तरह ही जॉर्ज अभी भी अपने घर के काम किया करते थे। जब वो 90 के हुए तब जाकर उन्होंने काम करना बंद किया, लेकिन वह खुश थे कि वो जीवन भर एक्टिव रहकर काम करते आए थे। जॉर्ज मानते थे कि आदमी काम करने के लिए बने हैं इसलिए उन्हें काम करते रहना चाहिए. इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि काम क्या है. लेकिन काम करने से उसे गर्व महसूस होता है।

जॉर्ज हमेशा से पढ़ना-लिखना चाहते थे, लेकिन गरीबी की वजह से काम करना उनकी मजबूरी बन गई थी। उन्होंने इस बात का पूरा ख़याल रखा कि उनके सभी बच्चे अच्छे से पढ़-लिख जाएँ। लोग सोचते थे कि जॉर्ज वापस स्कूल क्यों नहीं गए। उनके पास रिटायरमेंट के बाद काफी ख़ाली वक़्त था, लेकिन उन्हें लगता था कि स्कूल सिर्फ बच्चों के लिए होता है। जॉर्ज एक प्राइवेट ट्यूटर नहीं रख सकते थे क्योंकि उनके पास इसके लिए पैसे नहीं बचे थे।

लेकिन एक दिन, मिस्टर हेनरी नाम के एक शख्स फ्लायर्स यानी पर्चे बांटते बांटते उनके दरवाज़े पर आए। पहले तो जॉर्ज हेनरी को रफा-दफा करना चाहते थे क्योंकि वह पढ़ना तो जानते नहीं थे तो फ्लायर लेने का क्या मतलब था? लेकिन जब हेनरी ने बताया कि वह पढ़ने के साथ साथ एडल्ट एजुकेशन की क्लास ऑफर कर रहे हैं तो जॉर्ज ने तुरंत अपना मन बदल दिया। उन्होंने हेनरी से हाथ मिलाते हुए कहा, "मैं क्लास में ज़रूर आऊंगा।"

4 जनवरी, 1996 को जॉर्ज ने पहली बार स्कूल में कदम रखा। अब वो 98 के हो गए थे। वह हमेशा जल्दी से जल्दी क्लास पहुँच जाते थे और उनमें सीखने के लिए बहुत उत्सुकता रहती थी। जॉर्ज ने अपनी पूरी ज़िंदगी कड़ी मेहनत की थी। वह जानते थे कि पढ़ना सीखना मुश्किल होगा, लेकिन वो इससे घबराए नहीं क्योंकि उन्होंने पहले ही अपनी लाइफ में कई चैलेजेज़ का सामना कर लिया था।

जब से जॉर्ज ने स्कूल जाना शुरू किया था तब से स्कूल में बहुत कुछ बदल गया था। मिस्टर हेनरी दूसरे टीचर्स की जगह काम कर रहे थे, लेकिन जब से जॉर्ज उनके स्टूडेंट बने थे उन्होंने कभी स्कूल नहीं छोड़ा। जॉर्ज के साथ कई लोग क्लास में जाते थे। कई माएँ अपने बच्चों को जॉर्ज का एग्ज़ाम्पल देती थीं। उनसे उम्र में छोटे क्लासमेट और मिस्टर हेनरी को भी जॉर्ज से बहुत कुछ सीखने मिल रहा था।

जब जॉर्ज के बच्चे छोटे थे तब वो हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि उनके बच्चे स्कूल में अच्छे से पढ़ाई करें। पढ़ना-लिखना न जानने के बावजूद भी वह हमेशा उनके होमवर्क में उनकी मदद करते थे। स्कूल से आने के बाद जॉर्ज हमेशा अपने बच्चों से पूछते थे कि क्या वो मन लगाकर पढ़ रहे हैं तो वो जवाब में हामी में अपना सर हिला देते थे। अब समय का पहिया जैसे घूम गया था, अब जब भी उनका बेटा जूनियर उनसे मिलने आता तो वह जॉर्ज से पूछता कि क्या वो स्कूल में मेहनत से पढ़ रहे हैं तो अब जॉर्ज हामी में अपना सिर हिलाकर जवाब देते थे। जूनियर अपने पिता से कहता कि स्कूल जाना बहुत ज़रूरी है। वहाँ सीखने के लिए कितना कुछ है और उसे अपने पिता पर बहुत गर्व है।

Conclusion

इस समरी में, आपने समझा कि जीवन संघर्षों से भरा हुआ है, फिर भी हमारे पास शुक्रगुज़ार होने के लिए कुछ ना कुछ ज़रूर होता है। लाइफ असल में complicated है भी नहीं। आप सादा जीवन जी सकते हैं, बस दूसरों का सम्मान करें और खुद की और दूसरों की मदद करने का ज़ज्बा रखें।

103 साल की ज़िंदगी में, जॉर्ज डॉसन ने कई परेशानियों का सामना किया। लेकिन जब तक वह अपनी फैमिली के लिए कमा रहे थे और किसी का बुरा नहीं कर रहे थे, तब तक उन्होंने किसी और चीज़ की परवाह नहीं की। उनके लिए इतना ही काफी था।

इस बुक के ऑथर रिचर्ड ग्लॉबमैन, जब जॉर्ज के साथ काम कर रहे थे तब उन्हें जॉर्ज की बड़ी चिंता हो रही थी क्योंकि उन्हें अकेले रहने की आदत थी, लेकिन जॉर्ज के साथ रहने के कुछ महीनों के अंदर ही रिचर्ड को एहसास हुआ कि वह अकेले नहीं थे। भले ही जॉर्ज अकेले रहते थे लेकिन उनके बच्चे लगभग हर दिन उनसे मिलने के लिए आते थे। उनके टीचर मिस्टर हेनरी भी अक्सर उनसे मिलते थे और उनके पड़ोसी भी उनसे मिलने आते और उनके लिए खाना भी लाते थे।

ऐसे कई लोग थे जिन्होंने जॉर्ज के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया था, लेकिन जॉर्ज इस बारे में नहीं सोचते थे। अगर वो उनके साथ अच्छा बर्ताव भी करते तब भी जॉर्ज को कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता, वो जानते थे कि दुनिया ऐसे ही चलती रहेगी। इस बात ने उनके मन में कडवाहट नहीं भरी और उन्होंने कभी किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं किया। अगर कुछ लोगों ने जॉर्ज के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया था तो ऐसे भी कई लोग थे जो जॉर्ज को बेहद पसंद करते थे।

हमें सब्र के साथ जीना सीखना चाहिए और हमेशा खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। जब लोग जॉर्ज के बारे में सुनते हैं कि उन्होंने 98 की उम्र में पढ़ना-लिखना सीखा है तो उनके मन में भी आता है कि अगर वो ऐसा कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं। जॉर्ज ने बहुत से लोगों की मदद की और जो बदलाव वो लोगों की ज़िंदगी में ला पा रहे थे उसे देखकर उन्हें बहुत ख़ुशी होती थी।

जॉर्ज डॉसन से हम सब कितना कुछ सीख सकते हैं। हमें दूसरों के प्रति काइंड यानी दयालु होना चाहिए क्योंकि हम नहीं जानते कि वे किस सिचुएशन से गुज़र रहे हैं।

और सबसे ज़रूरी बात तो ये है कि हमें लाइफ को पूरी तरह से जीना चाहिए। सुनने में सौ साल बड़ा लंबा वक़्त लग सकता है, लेकिन जैसा कि जॉर्ज कहते हैं कि वक़्त इतनी जल्दी बीत जाता है कि पता ही नहीं चलता। हमें हर पल को यादगार बनाने की कोशिश करनी चाहिए। कड़ी मेहनत कीजिए और हमेशा सही काम कीजिए।

जॉर्ज को सिगरेट या शराब पीने की लत नहीं थी। उनके पास गिने-चुने कपड़े थे और वो बहुत सादगी से रहते थे। लेकिन जॉर्ज ने कई लोगों को मीनिंगफुल लाइफ जीने के लिए इंस्पायर किया। आपके पास जो है उसकी कद्र करना सीखिए. हमारे पास जो नहीं है हम उसके लिए अनगिनत शिकायतें करते ही रहते हैं लेकिन आपके पास कितना कुछ है उसे देखकर संतुष्ट होना सीखिए। यकीन मानिए, ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है और ये हर गुज़रते दिन के साथ और भी बेहतर और सुंदर होती जाएगी।

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