GENGHIS KHAN Book Summary in Hindi - GENGHIS KHAN - And The Making of The Modern World by Jack Weatherford - Howdy Guys, अपने पीक पर, मंगोल एंपायर लगभग पूरे एशिया में फैला हुआ था। यहां तक की 20th सेंचुरी में भी चंगेज़ ख़ान के वंशजों के पास कई राज्यों का कंट्रोल था। लेकिन एक आदिवासी शिकारी को दुनिया का सबसे महान सम्राट बनने के लिए किस चीज़ ने इंस्पायर किया था? चंगेज़ ख़ान इतने पावरफुल कैसे बन गए थे? इस समरी में चंगेज़ ख़ान की ज़िंदगी और मॉडर्न वर्ल्ड पर उनके प्रभाव के बारे में बताया गया है।
यह समरी किसे पढ़नी चाहिए?
- हिस्ट्री पसंद करने वाले लोगों को
- कम्युनिटी लीडर्स को
- पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को
ऑथर के बारे में
जैक वेदरफ़ोर्ड एक एंथ्रोपोलॉजिस्ट और मैकलेस्टर कॉलेज में प्रोफेसर हैं। शुरुआत में, वह अपने रिसर्च का फोकस नेटिव अमेरिकन कल्चर पर रखते थे, लेकिन उन्हें मंगोल एंपायर पर किए गए उनके काम के लिए ज़्यादा जाना जाता है। फिलहाल, वेदरफ़ोर्ड मंगोलिया में रहते हुए अपनी रिसर्च को आगे बढ़ा रहे हैं।
GENGHIS KHAN Book Summary in Hindi
इंट्रोडक्शन
महान शासकों की एक पहचान ये है कि वो किस्मत के खिलाफ संघर्ष करके महान बने हैं और इसकी झलक चंगेज़ ख़ान की कहानी में नज़र आती है। उनका जन्म ऐसे दौर में हुआ था जब जाती के नाम पर या आदिवासियों के साथ अत्याचार किए जाते थे और इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए चंगेज़ खान के पास ताकत नहीं थी। उस समय हर जगह मर्डर, किडनैपिंग और गुलामी का बोलबाला था।
अनगिनत मुसीबतों के बावजूद चंगेज़ ख़ान ने हिम्मत नहीं हारी। दुनियादारी से बेखबर और बिना किसी पहचान से आगे बढ़कर अपना खुद का एंपायर बनाना, मामूली बात नहीं है। सबसे जरूरी बात तो यह है की चंगेज़ ख़ान के लड़ने का तरीका बड़ा ही अनोखा या कह लीजिए कि रिवॉल्यूशनरी था। उन्होंने कवच पहनकर तलवारों से लड़ने वाले योद्धाओं के दिनों को और शहरों को दीवारों से घेरकर रखने के दिनों को खत्म कर दिया था। इसी की बदौलत सिर्फ़ 25 साल में, जितनी टेरिटरी पर रोमंस ने चार सेंचुरी में कब्ज़ा किया था, उससे भी ज्यादा टेरिटरी पर मंगोल्स ने अपने अधिकार में कर लिया था।
यह समरी आपको चंगेज़ ख़ान के बचपन और सत्ता तक पहुंचने के बारे में बताएगी। उनकी कहानी हमें हिम्मत, ईमानदारी और पेशेंस जैसे कीमती सबक सिखाती है।
आप यह भी जानेंगे की मंगोल राज्य एशिया में कैसे फैला। चंगेज़ ख़ान ने अपने राज्य को चाइना से मिडिल ईस्ट तक बढ़ाने के लिए यूनिक तरीकों का इस्तेमाल किया था। इस समरी में बताया गया है की कैसे मंगोल एंपायर ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया था। इसके असर को आज भी महसूस किया जा सकता है।
चंगेज़ खान की कहानी सिर्फ़ हिस्ट्री का एक और चैप्टर नहीं है बल्कि उससे बढ़कर है। ये एक इंसान की पूरी दुनिया के ख़िलाफ़ जंग के बारे में है। चंगेज़ ख़ान की विरासत हमें उस ताकत के बारे में बताती है जो कहीं ना कहीं हमारे अंदर बसी हुई है।
The Reign of Terror On The Steppe
March 1220 में, चंगेज़ ख़ान अपनी आर्मी के साथ बुखारा शहर के बीचों-बीच पहुँचें। यह शहर ना तो उस देश का कैपिटल था और ना ही कॉमर्स का सेंटर था। हालांकि, चंगेज़ ख़ान को बुखारा पर कब्ज़ा करने में फायदा नजर आ रहा था, जो आज उज़्बेकिस्तान का हिस्सा है। यह मुसलमानों के लिए एक पवित्र जगह थी जिसे “इस्लाम के गहने और शान” की तरह जाना जाता था।
बुखारा पर चंगेज़ ख़ान का हमला उनके मिलिट्री जीनियस होने को दिखाता है। उनकी आर्मी की एक टुकड़ी ने शहर की दीवारों पर सामने से हमला किया था। वहीं, एक टुकड़ी ने दुश्मनों पर पीछे से हमला करने के लिए दो हजार मीलों की दूरी तय की थी। बुखारा के रक्षकों ने कभी रेगिस्तान की तरफ से हमला होने की उम्मीद नहीं की थी।
मंगोल आर्मी ऐसे चाल सिर्फ इसलिए चल पाती थी क्योंकि वह हल्के सामान लेकर सफ़र करते थे। औरों की सेनाएं, चलते वक्त घेराबंदी वाले भारी हथियारों को साथ लेकर चलती थीं। लेकिन, चंगेज़ ख़ान के पास अपनी आर्मी में इंजीनियरों का एक डिवीज़न था, जो किसी शहर में पहुंचने के बाद गुलेल, गोलियां आदि जैसे हथियार बनाते थे।
बुखारा आसानी से उनके कब्ज़े में आ गया था, लेकिन इस घेराबंदी से एक और मकसद पूरा हुआ था। चंगेज़ ख़ान की ताकत देखने के बाद पास के समरक़ंद शहर ने भी उनके सामने अपने हथियार डाल दिए थे। 1220 में उस दिन के बाद से, चंगेज़ ख़ान के खानदान ने 700 सालों तक बुखारा पर राज किया। बुखारा को 1920 में सोवियट यूनियन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था।
बुखारा, चंगेज़ ख़ान की कई सदियों तक चलने वाली विरासत का सिर्फ एक वाक्या है, लेकिन एक महान योद्धा एक लेजेंड कैसे बना? इसकी कहानी एक छोटे से कबीले से शुरू होती है जिसका नाम बोरिजिन (Borijin) था। वो ताइइचिउड (Taiyichiud) नाम के एक बड़े ग्रुप के नौकर हुआ करते थे।
बोरिजिन उन आदिवासियों ने से एक हैं जो यूरेशियन के स्टेपी इलाके में रहते थे। ये आदिवासी आगे चलकर मंगोल बन गए थे, लेकिन उस समय उन्हें छोटी जाति का माना जाता था।
मंगोल, वेस्ट में तुर्कों के और ईस्ट में टाटर के बीच रहते थे। कभी-कभी उन्हें ब्लैक टाटर या ब्लू टर्क भी कहा जाता था।
येसुगेई एक बोरिजिन शिकारी थे जो जवान हो गए थे। उस समय में, उनके पास अपने लिए एक पत्नी ढूंढने के दो तरीके थे। ट्रेडिशनल तरीका था की वो किसी लड़की से शादी करने के लिए उसके मां-बाप की कुछ सालों तक सेवा करे।
दूसरा तरीका था की वह एक दुल्हन को किडनैप कर ले। एक रात, येसुगेई ने एक टीनेज लड़की को किडनैप कर लिया जिसका नाम होएलुन था। वह ओलखुनुउद (Olkhunuud) कबीले से थी, जिन्हें उनकी खूबसूरती के लिए जाना जाता था।
1162 में, होएलुन ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। भले ही बाद में उन्हें चंगेज़ ख़ान के नाम से जाना जाता था, लेकिन शुरुआत में उनके पिता ने अपने बच्चे का नाम ‘टेमुजिन’ रखा था। यह नाम “टेमुल” से आया है। इसके कई मतलब हो सकते हैं। इनमें निडर होकर दौड़ना, इंस्पायर होना, या क्रिएटिव थॉट रखना, शामिल हैं।
होएलुन, येसुगेई की पहली पत्नी नहीं थी। उनका पहले से सोचीगेल नाम की औरत से एक बेटा था जिसका नाम बेग्टर था। येसुगेई को डर था की जब उसके दोनों बेटे टेमुजिन और बेग्टर बड़े हो जाएँगे तो सत्ता के लिए एक दूसरे से लड़ेंगे। इसलिए, येसुगेई ने टेमुजिन के लिए तब से ही लड़की ढूंढना शुरू कर दिया था जब वह सिर्फ 8 साल के थे।
टेमुजिन को एक घर में रहने के लिए छोड़ दिया गया था. उस परिवार की बेटी का नाम था बोर्ते (Borte)। दोनों बच्चे एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। टेमुजिन उस घर में काम करते थे और उनके ससुराल वाले उन्हें ऑब्जर्व करते थे। धीरे-धीरे, टेमुजिन और बोर्ते के बीच इतना लगाव हो गया था कि उनकी शादी आराम से की जा सकती थी।
लेकिन बदकिस्मती से, एक दिन घर लौटते वक़्त येसुगेई को टार्टर के लोगों ने मार दिया। संदेश लाने वाला एक दूत, टेमुजिन को उनके पिता के पास घर वापस ले आया। येसुगेई के मरने के बाद, उन आदिवासियों ने टेमुजिन के परिवार को अकेला छोड़ दिया। वह मुफ़्त में किसी औरत और उसके बच्चों का पालन-पोषण नहीं करना चाहते थे।
येसुगेई अपने पीछे दो विधवा और सात बच्चों को छोड़ गए थे। अगर उनके पास सपोर्ट करने के लिए कोई शिकारी ना होता तो वह सभी अगली ठंड आने तक मर जाते। लेकिन जैसे-तैसे ये परिवार बच गया। ये लोग फल और जड़ों को इकट्ठा करने के साथ चूहों का शिकार करने लगे थे।
इन जिम्मेदारियों की वजह से, टेमुजिन के पास मज़े करने और गेम्स खेलने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं होता था। उनके बचपन के सिर्फ एक ही दोस्त के बारे में सब जानते हैं जो जमुका नाम का एक बड़ा लड़का था। मंगोल्स के बीच एक परंपरा थी जिसमें वह भाईचारे जैसा रिश्ता बना लेते हैं और उसे “अंडास” कहा जाता है। अंडा के साथ आपका जो कनेक्शन होता है वो आपके भाई के साथ संबंध से भी ज्यादा मज़बूत होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अंडास को आप खुद चुन सकते हैं लेकिन अपने भाई को नहीं चुन सकते।
टेमुजिन और जमुका ने एक बार एक रस्म की थी जिसमें उन्होंने एक दूसरे का खून पीया था। उस पल के बाद से वो अंडास बन गए थे। एक तरफ यह दोस्ती बढ़ रही थी तो दूसरी तरफ टेमुजिन का अपने सौतेले भाई बेग्टर के साथ रिश्ता और भी खराब होता जा रहा था।
क्योंकि बेग्टर परिवार के लड़कों में सबसे बड़ा था, इसलिए उसने टेमुजिन पर हुकुम चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे, टेमुजिन अपने छोटे भाई खासर के साथ मिल गया। उन्होंने एक शाम, बेग्टर पर तीर चलाकर उसे मार दिया।
बेग्टर का मर्डर करने के बाद टेमुजिन को बहुत बुरे नतीजों का सामना करना पड़ा। भले ही उन्हें कबीले से निकल दिया गया था, लेकिन आदिवासियों के क़ानून अभी भी उन ऊपर लागू होते थे। ताइचिउड नाम के एक पावरफुल स्टेपी कबीले ने टेमुजिन को पकड़ लिया था और उन्हें पिंजरे में कैद कर दिया था। उन्हें एक लकड़ी के तख्ते से बाँध दिया गया था जिस वजह से उनका हिलना-डुलना भी मुश्किल था।
कई सालों तक दर्द झेलने के बाद, टेमुजिन जैसे-तैसे ताइचिउड की कैद से भाग निकले। अब 16 साल की उम्र में, उन्होंने बोर्ते को ढूंढना शुरू किया, जिस दुल्हन को वह 7 साल पहले छोड़ आए थे। टेमुजिन को यह जानकर बहुत खुशी हुई थी की बोर्ते अभी भी उनका इंतज़ार कर रही थी। इसके बाद उन्होंने शादी कर ली और वे टेमुजिन के परिवार के पास लौट गए।
मंगोल परम्पराओं के हिसाब से, दुल्हन दूल्हे को एक कीमती कपड़ा देती है। बोर्ते ने टेमुजिन को एक कोट दिया था जो कीमती ब्लैक सेबल फर का बना हुआ था। उस समय, उन्हें एहसास हुआ की इस तोहफे को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था।
टेमुजिन ने वह कोट ओंग ख़ान को दे दिया, जो खेरेयिड नाम के पावरफुल कबीले के लीडर थे। टेमुजिन को अभी भी ताइचिउड से खतरा था, लेकिन ओंग ख़ान उन्हें बचा सकता था। उस खेरेयिड लीडर ने टेमुजिन के तोहफे को कबूल कर अपने कबीले में शामिल कर लिया।
लेकिन टेमुजिन बस कुछ समय के लिए ही सुरक्षित रह पाए थे। ओलखुनुड (Olkhunuud) कबीला येसुगेई द्वारा होएलुन को किडनैप करने का बदला लेने के लिए वापस आ गया था। टेमुजिन की माँ को किडनैप करने के बजाय, वो उनकी पत्नी बोर्ते को उठा कर ले गए। टेमुजिन को स्टेपी कबीलों के बीच लगातार होने वाली यह लड़ाई बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। लेकिन अब उनके पास कोई चारा नहीं था। उन्हें अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए लड़ना ही पड़ा।
टेमुजिन ने ओंग ख़ान से मदद मांगी। वह मान गया और टेमुजिन को अपने यंग जनरल्स में से एक से मिलवाया। यह और कोई नहीं बल्कि टेमुजिन के बचपन का खून का भाई, जमुका था। उन तीनों आदमियों ने अलग-अलग टुकड़ियों को लीड किया और तुरंत बोर्ते को बचाकर ले आए। यह उन अनेकों हमलों में से पहला हमला था जिसे टेमुजिन ने लीड किया था।
उनकी जीत के बाद, टेमुजिन ने जमुका के कबीले को ज्वाइन कर लिया, लेकिन बेग्टर की तरह टेमुजिन अपने ऊपर किसी बॉस को बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। उन्होंने जमुका को मारा नहीं लेकिन काबिले से बाहर हो गए। जमुका के कई फॉलोअर्स टेमुजिन को ज्वाइन करने के लिए उनके साथ चले गए थे।
War of the Khans
कबीले के लीडर होने के नाते टेमुजिन स्टेपी में होने वाली लड़ाई का हल ढूंढना चाहते थे। उन्होंने सारे मंगोल कबीलों को एक साथ मिलाने की कोशिश की थी। टेमुजिन ने ओंग ख़ान को एक ख़त भेजा जिसमें उन्होंने इस मिशन के लिए उनका आशीर्वाद मांगा था। ओंग ख़ान ने इसके लिए मंज़ूरी दे दी थी। जब तक वह सभी उनके लिए ईमानदार थे तब तक उन्हें फ़र्क नहीं पड़ता था की मंगोल्स एक साथ मिल-जुलकर रहते हैं या नहीं।
जमुका को टेमुजिन के इस नए टारगेट से खतरा महसूस होने लगा। उसने तय किया की वह टेमुजिन को सबक सिखाएगा और उसे नीचा दिखाएगा। जमुका ने टेमुजिन के फॉलोअर्स में से कुछ लोगों पर हमला कर दिया। फिर, वो उन्हें बुरी तरह torture करता था।
एक केस में, उसने 70 यंग आदमियों को कैद कर उन्हें ज़िन्दा उबाल दिया था। इन घटनाओं से टेमुजिन की मदद ही हो रही थी। लोगों को जमुका के बेवजह की क्रूरता से डर लगने लगा था। वो टेमुजिन को ज्यादा ईमानदार लीडर की तरह देखने लगे थे।
टेमुजिन ने 1197 में 35 की उम्र में मंगोल्स को एकजुट करने की मुहीम की शुरुआत की। कई सालों तक ओंग ख़ान के लिए काम करके उन्होंने अपने योद्धा होने के स्किल्स को डेवलप कर लिया था। उनका पहला हमला जर्किन के खिलाफ था, ये वो कबीले था जिन्होंने कुछ समय पहले उनकी बेइज्जती की थी।
जर्किन को उन्होंने आसानी से हरा दिया, लेकिन उसके बाद जो हुआ वह उस समय के लिए रिवॉल्यूशनरी साबित हुआ। आमतौर पर, मंगोल्स किसी कबीले पर हमला करते थे, उनके सामानों को लूट लेते थे और फिर वहां से चले जाते थे। लेकिन उस हमले में बचे हुए लोग या तो एकजुट होकर उनके ख़िलाफ़ खड़े हो जाते थे या उनके दुश्मन कबीलों में शामिल हो जाते थे। फ़िर वो उन पर हमला करने के लिए लौटते थे और इस तरह युद्ध का ये सिलसिला चलता रहता था।
इस बात को समझकर, टेमुजिन ने जनता के सामने एक मुकदमा चलाया और जर्किन लीडर्स को सबसे सामने मार दिया। फिर, उन्होंने जर्किन कबीले के सभी जमीनों को अपने कब्ज़े में ले लिया और जो लोग ज़िन्दा बच गए थे उन्हें मंगोल लोगों के घरों में काम करने के लिए भेज दिया गया।
1201 में ताइचिउड को जीतने के बाद भी टेमुजिन की जीत का सिलसिला कायम रहा। यह वही कबीला था जिसने कई साल पहले उन्हें कैद किया था। हालांकि, टेमुजिन ने उनका अपने साम्राज्य में स्वागत किया था।
1202 में, उन्होंने टाटर्स को हरा दिया। यह वो ईस्टर्न कबीला था जो हमेशा से मंगोल्स से ज्यादा ताकतवर रहा था।
टाटर्स पर हमला करने के बाद टेमुजिन ने उनके लिए नए नियम बना दिए थे। वह लूटे हुए सामानों को इकट्ठा करते थे और फिर ईमानदारी से उसे लोगों के बीच बांट देते थे। युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवा और उनके बच्चों को उन सैनिकों के हिस्से की चीज़ें मिल जाती थी।
इस वजह से गरीब क्लास के लोग टेमुजिन को और भी ज्यादा पसंद करने लगे थे। उनके योद्धा और भी ज्यादा वफ़ादार हो गए थे क्योंकि उनके परिवार का खयाल रखा जाता था।
हालांकि, टाटर्स जैसे फॉरेन कबीलों को मंगोल एंपायर में इतनी आसानी से नहीं मिलाया जा सकता था। टेमुजिन ने टाटर कबीले के बच्चों को गॉड लिया और दो टाटर औरतों को अपनी दुल्हन बनाया। इसने दूसरे मंगोल्स के सामने एक उदाहरण पेश किया की उन्हें भी टाटर्स को अपने परिवार की तरह स्वीकार करना चाहिए।
स्टेपी कबीले आमतौर पर बड़े टेंट में रहते थे जिन्हें “गर” कहा जाता था। टेमुजिन ने अपने फॉलोअर्स का नाम रखने के लिए इस कॉमन स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया। उन्होंने उनका नाम “पीपल ऑफ द फेल्ट वॉल्स” रख दिया। इससे उन्हें कबीलों के बीच में अंतर को खत्म करने के मदद मिली।
टेमुजिन की कामयाबी देखकर ओंग ख़ान ने उनकी ह्त्या करने की कोशिश की, लेकिन इस कोशिश से टेमुजिन को खेरेयिड कबीले पर हमला करने का बहाना मिल गया। इसमें मिलिट्री की हार नहीं थी। ओंग ख़ान के कई सैनिकों को पहले से ही टेमुजिन की पॉलिसी के बारे में पता था और इसलिए वह उनकी तरफ आ गए। ओंग ख़ान के पास अपना बचाव करने के लिए कुछ नहीं बचा था।
आखिरी मंगोलियन कबीला जिसे हराया गया था उसका नाम नाइमन था। टेमुजिन ने मिलिट्री की स्ट्रेटजी को शानदार तरीके से दिखाते हुए उन्हें हराया था। पहला, उन्होंने अपने आदमियों को moving bush यानी चलती हुई झाडी का फॉरमेशन करने के लिए कहा।
इसमें दस-दस आदमियों के छोटे ग्रुप शाम होने से पहले तेज़ी से आगे जाते थे और फिर नाइमन पर हमला करते थे। फिर, वह तुरंत पीछे हट जाते थे। इससे दुश्मनों को चोट लग जाती थी और वह थक जाते थे।
जैसे ही सूरज उगता था, तब टेमुजिन लेक यानी झील जैसे फॉरमेशन का इस्तेमाल करते थे। उनके तीरंदाज़ एक लंबी लाइन बनाते थे और फिर दुश्मनों पर तीर छोड़ते थे। एक सेट तीर छोड़ने के बाद, नया ग्रुप आगे आता था और फिर वह शूट करता था। तीरों की लहर नाइमन कबीले से ऐसे टकराती थी जैसे लेक के किनारों से लहरे टकराती हैं।
नाइमन तीरों से होने वाले नुकसान को कम से कम करने के लिए दूर-दूर खड़े हो जाते थे। जवाब में, टेमुजिन अपनी आर्मी को chisel यानी छेनी जैसा फॉरमेशन बनाने का ऑर्डर देते थे। वह एक गहरा, पतला कॉलम बना लेते थे और फिर नाइमन के पतले लाइन पर हमला करते थे।
इस स्ट्रेटजी के साथ, टेमुजिन ने बहुत जल्दी नाइमन को हरा दिया था। उन्होंने उन सभी मंगोल कबीलों को मिटा दिया था जो उनके खिलाफ थे। जमुका कुछ आदमियों के साथ नॉर्दन जंगलों में भाग गया था, लेकिन अब उसके पास टेमुजिन को चैलेंज करने के लिए मिलिट्री की ताकत नहीं थी।
1205 में, जमुका के फॉलोअर्स के एक ग्रुप ने उसे पकड़ा और टेमुजिन के पास ले आए। उन्हें मंगोल साम्राज्य को ज्वाइन करने की उम्मीद थी। लेकिन टेमुजिन को गद्दारों से नफरत थी और उन्होंने तुरंत ही उन आदमियों को मार दिया।
टेमुजिन के सत्ता में आने के पीछे, अपने से ऊपर के सभी लोगों की ह्त्या करना शामिल था। पहले, उन्होंने अपने भाई, बेग्टर को मारा। फिर जिस कबीले ने उनकी पत्नी को किडनैप किया था और उनके पिता को मारा था, उन्होंने उसे बर्बाद किया। उन्होंने टेमुजिन ने ताइचिउड और जर्किन जैसे ऊंचे रैंक वाले सारे मंगोल कबीलों को खत्म कर दिया। आखिर में, उन्होंने जमुका को मार दिया, जो उनका पहला दुश्मन और सगा भाई था।
मंगोल में सारे दुश्मनों के खत्म होने के बाद, टेमुजिन अब लगभग एक मिलियन से ज्यादा लोगों के ऊपर राज कर रहे थे। उन्होंने अपने साम्राज्य का नाम "येके मंगोल यूलुस" या “महान मंगोल देश” रख दिया।
उन्होंने पुराने सारे रॉयल टाइटल को खत्म कर दिया था, इसलिए टेमुजिन ने अपने लिए एक नया टाइटल बनाया। उन्होंने अपना नाम “चिंगिस ख़ान” रख लिया। यह टाइटल बाद में इवोल्व होकर पूरी दुनिया में चंगेज़ ख़ान की तरह जाना जाने लगा।
इतने बड़े साम्राज्य में शांति बनाए रखना बहुत बड़ा चैलेंज था। इसलिए, चंगेज़ ख़ान का पहला कदम था सभी मंगोल्स के लिए एक कॉमन लॉ बनाना। इन्हें ग्रेट लॉ के नाम से जाना जाता था, लेकिन ये रूल्स भगवान के बनाए हुए रूल्स के हिसाब से नहीं थे। उन्होंने पहले के ट्रेडिशन से कुछ कॉन्सेप्ट लिए थे। जिन चीज़ों से शांति और एकता को खतरा होता था उनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
Example के लिए, जब आदमी औरत को किडनैप करते थे तो कबीले एक दूसरे से लड़ते थे। तो, चंगेज़ ख़ान के पहले लॉ ने इस चीज़ को खत्म कर दिया। साथ ही, उन्होंने ऐलान कर दिया की कोई भी मंगोल्स को गुलाम नहीं बना सकता है।
जानवरों को चुराना लोगों की एक आम आदत थी और अक्सर इस वजह से कबीलों के बीच युद्ध हो जाता था। इसलिए, चंगेज़ ख़ान ने जानवरों को चुराने पर मौत की सज़ा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने गुम हुए जानवरों को वापस लाने के लिए एक लॉस्ट-एंड-फाउंड सिस्टम यानी खोया-पाया विभाग भी बना दिया।
घर में पाले जाने वाले जानवरों के अलावा, कबीलों के बीच जंगली जानवरों का शिकार करने के अधिकार को लेकर लड़ाई होती थी। द ग्रेट लॉ में शिकार करने के लिए एक नए मौसम के बारे में बताया गया था। मार्च से अक्टूबर के बीच के ब्रीडिंग महीनों के दौरान कबीलों को शिकार करने की इजाज़त नहीं थी। इसका नतीजा यह हुआ कि ठंड के महीनों के दौरान उनके पास कई जानवर मौजूद रहते थे।
ग्रेट लॉ के सबसे एडवांस फीचर्स में से एक यह था की वह किस-किस पर लागू होता था। चंगेज़ ख़ान ने ऐलान कर दिया था की कोई भी उससे आज़ाद नहीं है। यहां तक की अगर ख़ान खुद किसी भी क़ानून को तोड़ते तो उसके लिए उन्हें सज़ा दी जा सकती थी।
ये बाकी के सभी साम्राज्यों से अलग था। दूसरे शासकों का कहना था की उन्हें भगवान से अधिकार मिला है। इसका सीधा मतलब ये था वो ख़ुद को लॉ से भी ऊपर मानते थे और जो चाहे वो कर सकते थे।
The Mongol World War
जर्च्ड (Jurched) एक कबीला था जो चाइना के झोंग्डू इलाके में रहता था। पहले, उन्होंने खेरेयिड पर राज किया था। 1210 में, जर्च्ड के गोल्डन ख़ान की मौत हो गई और उनके युवा बेटे गद्दी पर बैठ गए।
नए गोल्डन ख़ान ने मंगोल्स के पास एक दूत भेजा। उन्होंने उनकी साइन की मांग की थी की वह अभी भी जर्च्ड की सेवा करते हैं। हालांकि, चंगेज़ ख़ान को इस ऑर्डर से बेइज्जती महसूस हुई। वह मंगोल्स को जर्च्ड का गुलाम बनने नहीं देना चाहते थे।
जर्च्ड, चाइना और वेस्ट के बीच होने वाले ट्रेड को कंट्रोल करते थे। चंगेज़ ख़ान उनके ट्रेड के डॉमिनेंस को छीनना चाहते थे। गुलाम बनने के इस ऑर्डर से उन्हें हमला करने का बहाना मिल गया।
मंगोल्स और जर्च्ड के बीच तीन राज्यों की दूरी थी, जो थे : उइघुर, तांगुत और ब्लैक खितान (Uighurs, Tangut and Black Khitan)। उइघुर ने कई साल पहले चंगेज़ ख़ान के प्रति अपनी वफादारी का वादा किया था। वहीं, चंगेज़ ख़ान ने 1209 में हाल ही में तांगुत को जीता था।
तांगुत पर किया हुआ हमला चंगेज़ ख़ान के सैनिकों के लिए एक कीमती सबक साबित हुआ था। उन्होंने पहली बार किसी ऐसे शहर के खिलाफ लड़ाई की थी जिसके चारों तरफ दीवार और बचाव करने के दूसरे तरीके थे। चंगेज़ ख़ान के पास घेराबंदी युद्ध का कोई एक्सपीरियंस नहीं था। इसलिए, उन्हें हमला करने के नए तरीकों की खोज करनी पड़ी थी।
चंगेज़ ख़ान की आर्मी ने सिंपल सबक सीखें जैसे की शहर में खाने की सप्लाई को बंद कर देना। इसके अलावा, उन्होंने दुश्मन शहरों में बाढ़ लाने के लिए येलो नदी का रास्ता बदलने जैसे नई तरीकों को आज़माया। चंगेज़ ख़ान की पहली कोशिश फेल हो गई और उनके अपने खुद के कैंप में पानी भर गया। लेकिन मंगोल्स धीरे-धीरे इसमें बेहतर हो गए।
मंगोल्स ने तांगुत से युद्ध के दौरान पहली बार गुलेल जैसे घेराबंदी वाले हथियारों को देखा था। चंगेज़ ख़ान इस टेक्नोलॉजी से बहुत इंप्रेस्ड थे और उन्होंने अपनी आर्मी को ज्वाइन करने वाले इंजीनियर्स को खुशी-खुशी इनाम दिए। उस प्वाइंट के बाद से, मंगोल हमेशा हमला करते वक्त अपने साथ इंजीनियर्स का एक डिवीज़न लेकर जाया करते थे।
इस एक्सपीरियंस के साथ तैयार होकर, मंगोल्स ने 1211 में जर्च्ड से युद्ध करने के लिए गोबी रेगिस्तान को पार किया। चंगेज़ ख़ान उस समय इसे छोटा सा युद्ध समझ रहे थे, लेकिन यह मंगोल आर्मी के आधी दुनिया पर कब्ज़ा करने की शुरुआत थी।
उस समय के चाइनीज़ हिस्टोरियंस मंगोल मिलिट्री को देखकर हैरान थे। उनके सैनिक बहुत ज्यादा सप्लाइ लेकर नहीं चलते थे। इसके बजाय, वह अपने साथ एक्स्ट्रा जानवर लेकर आते थे, जैसे की घोड़े। मंगोल्स ट्रैवल करते वक्त खाने के लिए इन जानवरों से दूध निकालते थे या उन्हें मार देते थे। शहरों में शिकार करके और उन्हें लूट कर वह खाना इकट्ठा करते थे।
उस समय की स्टैंडर्ड आर्मी लंबे कॉलम का फॉरमेशन करके चलती थी, लेकिन मंगोल्स दूर-दूर रहकर और फैलकर चलते थे ताकि उनके जानवरों के पास घास चरने के लिए जगह रहे। इसके अलावा, वह लगातार चलते रहते थे और कभी-कभार ही ज्यादा दिनों के लिए कैंप लगाते थे।
मंगोल्स, जर्च्ड के मुकाबले ज्यादा ताकतवर और मज़बूत थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि मंगोल योद्धाओं की डाइट मीट और दूध होती थी। यह ज्यादा प्रोटीन वाला डाइट मंगोल्स को मज़बूत बनाता था और उनमें बीमारियों के खिलाफ इम्यूनिटी को बढाता था।
वहीं, जर्च्ड अनाजों से बना डाइट लेते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि वह मंगोल्स के मुकाबले बहुत कमज़ोर थे।
चंगेज़ ख़ान को एहसास हुआ की जर्च्ड के शहरों को बर्बाद करना मुश्किल होगा। इसलिए, उन्होंने अपने दुश्मनों पर साइकोलॉजिकल युद्ध का इस्तेमाल करना शुरू किया। वह आस-पास के गांवों पर हमला करते और वहां उथल-पुथल मचा देते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि शहर के जनरल अपने हथियार डालने के लिए तैयार हो जाएँ।
मंगोल्स युद्ध के मैदान में सम्मान को अहमियत नहीं देते थे। उनके लिए जीत का मतलब था अच्छा और हार का मतलब था बुरा। आर्मी, जनता को रुकावट की तरह समझती थी। वह जिस गांव में जीत जाते थे वहां के नागरिकों का रेप करते थे और उन्हें मार देते थे। हालांकि, मंगोल्स इन किसानों को एक रिसोर्स की तरह देखते थे।
चंगेज़ ख़ान की आर्मी गांव में आग लगा देती थी जिस वजह से दहशत फ़ैल जाती थी। लोग दौड़कर सड़कों पर आने लगते थे, जिस वजह से रोड और सप्लाई का रास्ता बंद हो जाता था। किसान रहने की जगह की तलाश में शहरों में जाते थे। फिर, शहर में खाने की कमी होने लगती थी और वहाँ का सिस्टम भी ख़राब हो जाता था।
अक्सर, मंगोल आर्मी अपने फॉर्मेशन के सामने किसानों को खड़ा कर देती थी। आम जनता को इंसानी कवच की तरह इस्तेमाल किया जाता था। अक्सर, खाई को भरने के लिए कैद किए गए किसानों को उसमें धकेल दिया जाता था।
मंगोल्स उनकी बॉडी को पुल की तरह इस्तेमाल करते थे। मंगोल के लोगों की ज़िंदगी को बचाने के लिए चंगेज़ ख़ान की आर्मी कुछ भी कर सकती थी। दुश्मनों के यहां के नागरिक उनके लिए जानवरों से ज्यादा नहीं थे।
इन चालों की वजह से आगे बढ़ते हुए चंगेज़ ख़ान आखिरकार 1214 में झोंग्डू पहुंचे। इस प्वाइंट पर, गोल्डन ख़ान युद्ध से थक गया था और उसने चंगेज़ ख़ान के आगे हार मान ली और मंगोल्स को कई टन सोना, चांदी और सिल्क पेश किए।
मंगोलिया वापस जाते वक्त रास्ते में, चंगेज़ ख़ान ने विनाश का आखरी दाव खेला। जिस भी खेत से वह गुजर रहे थे, उनकी आर्मी उस खेत को पूरी तरह फ्लैट कर देती थी। खाई, दीवारों ओर फसलों ने मंगोल के हमले को बहुत स्लो कर दिया था। ऐसा करके वह उन जगहों को वापस फ्लैट घास का मैदान बना रहे थे।
ऐसा करने से, फ्यूचर में होने वाले युद्धों के लिए मंगोल्स के पास साफ रास्ता मौजूद रहता। इसके अलावा, घास वाली जगहें गाय,भैंसा, बकरियों, हिरण और दूसरे जानवरों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मंगोल्स हमले के दौरान खाने के लिए इन जानवरों का शिकार कर सकते थे।
चंगेज़ ख़ान इतने पैसे लेकर वापस आए थे जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी। मंगोल्स ने कभी इतना कामयाब हमला नहीं देखा था। सभी घरों में थोड़े-थोड़े सिल्क, गहने और परफ्यूम बाँटे गए थे। अब योद्धाओं के पास bronze और लोहे के हथियार थे।
जर्च्ड को हराने के बाद, चंगेज़ ख़ान ने पूरी तरह से सिल्क रूट पर कब्ज़ा कर लिया था। चाइना और मिडल ईस्ट के बीच से सफ़र करने वाले हर सामान को मंगोल के जमीन से होकर गुज़रना पड़ता था। उनका अगला कदम था की वह दुनिया के ग्लोबल ट्रेड को डॉमिनेट करने वाले मुस्लिम साम्राज्यों के साथ ट्रीटी यानी संधि के बारे में बात करें।
Sultan Versus Khan
चंगेज़ ख़ान ने मुहम्मद II से बात की, जो 1217 में ख्वारज़्म के सुल्तान थे। उन्होंने बताया की उन्हें ख्वारज़्म (जो आज का सेंट्रल एशिया है), उसे हासिल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। चंगेज़ ख़ान बस मंगोल साम्राज्य की संपत्ति बढ़ाना चाहते थे। सुल्तान ने खान की रिक्वेस्ट का पॉजिटिव जवाब दिया।
चंगेज़ ख़ान ने इस एहसान का बदला चुकाने के लिए 450 व्यापारियों के एक ग्रुप को ख्वारज़्म भेज दिया। लेकिन क्योंकि मंगोल्स ट्रेडर्स नहीं थे, इसलिए उन्होंने उईघुर कबीले के मुस्लिम और हिंदू लोगों को भेज दिया था। ख्वारज़्म के एक शहर ओटार के गवर्नर ने इन आदमियों को बंदी बना लिया। उन्होंने उनके सामानों को चुरा लिया और उन सभी व्यापारियों को मार दिया।
चंगेज़ ख़ान ने सुल्तान से मांग की की उस गवर्नर को सज़ा दी जाए। लेकिन सुल्तान ने इंकार कर दिया, जिससे ख़ान को बहुत गुस्सा आया। इस बेइज्जती की वजह से उन्होंने ख्वारज़्म देश के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया।
1219 में चंगेज़ ख़ान की आर्मी मिडल ईस्ट की तरफ बढ़ने लगी। उनकी एक्सपीरियंस्ड मिलिट्री तुरंत शहरों पर कब्ज़ा कर रही थी। मंगोल द्वारा ख्वारज़्म पर किए गए हमले में, किसी भी दूसरे हमले के मुकाबले ज्यादा तबाही हुई थी। अरब के नागरिक पढ़े-लिखे थे और उनका आर्किटेक्चर और टेक्नोलॉजी एडवांस था, लेकिन मंगोल्स ने इन सभी चीज़ों को मिट्टी में मिला दिया था।
चंगेज़ ख़ान का ख्वारज़्म के लोगों के साथ बर्ताव उनके क्लास पर डिपेंड करता था। अमीर और पावरफुल लोगों की उनके पूरे परिवार के साथ ह्त्या कर दी गई थी। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि आगे वो कभी विरोध न कर सकें। लेकिन बदला लेने के आखरी दाव में, चंगेज़ ख़ान ने सुल्तान की माँ को बंदी बना लिया। उन्हें मंगोलिया में गुलाम बनकर रहने के लिए भेज दिया गया।
आम जनता को गुलाम बना दिया गया था या युद्ध के टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्हें गड्ढें खोदने पड़ते थे और इंसानी कवच के जैसे बनकर रहना पड़ता था। जो लोग इन कामों के लिए फिट नहीं होते थे उन्हें मार दिया जाता था।
हालांकि, मंगोल्स प्रोफेशनल लोगों की बहुत कद्र करते थे। डॉक्टर, एस्ट्रोनॉमर, इंजीनियर और व्यापारियों की बहुत कद्र की जाती थी। मंगोल्स शिकारी थे, तो उन्हें ये पता नहीं था की किसी भी चीज़ को प्रोड्यूस कैसे करते हैं। इसका नतीजा यह हुआ की, उन्होंने हर तरह के कारीगरों को अपना लिया था। इसमें कारपेंटर, ज्वेलर, म्यूजिशियन और बावर्ची शामिल थे।
ख्वारज़्म पर हमला करने के दौरान, मंगोल्स ने इनफॉर्मेशन को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने के आर्ट को मास्टर कर लिया था। वह चंगेज़ ख़ान की शक्ति के किस्से सुनाने के लिए दूर-दूर तक दूतों को भेजा करते थे।
उस समय के हिस्टोरियंस का मानना था की चंगेज़ ख़ान से जीता नहीं जा सकता था। वह मंगोल्स को दुनिया का सबसे बड़ा आतंक बताते थे।
हालांकि, मंगोल्स अपने दुश्मन शहरों से साथ बर्ताव करने के तरीके में बहुत रिलैक्स्ड रहते थे। कई दुश्मन साम्राज्य अपने दुश्मनों में डर पैदा करने के लिए टॉर्चर को एक टूल की तरह इस्तेमाल करते थे।
सुलतान के बेटे जलाल अल-दिन, के साथ हुए 1228 के युद्ध के example को ही ले लीजिए। उसने 400 मंगोल कैदियों को घोड़ों में बांध दिया था और उन्हें पूरे शहर में घसीटकर ले गए थे। जो उसमें बच गए थे उन सभी को मनोरंजन के लिए कुत्तों को खिला दिया गया था। मंगोल्स द्वारा पब्लिक में दी जाने वाली सज़ा सिर्फ यही थी की वह बड़े ऑफिशियल्स को पब्लिक में फांसी देते थे।
असल में, जिन शहरों पर कब्ज़ा किया जाता था वहां के लोग उनके साथ होने वाले बर्ताव से अक्सर कन्फ्यूज़ हो जाया करते थे। जो डरावने किस्से उन्होंने मंगोल्स के बारे में सुने थे, वह उन किस्सों से बिल्कुल अलग होते थे। कुछ शहर के लोग इसे कमज़ोरी की निशानी समझ लेते थे और चंगेज़ ख़ान के खिलाफ विद्रोह कर देते थे।
लेकिन इन क्रांतियों से अक्सर शहर बर्बाद हो जाते थे। जैसा निशापुर के साथ हुआ था। एक विद्रोह में, चंगेज़ ख़ान के दामाद को तीर लग गया था। अप्रैल 1221 में, मंगोल्स ने उस शहर से अपना बदला लिया। लेजेंड्स का कहना है की निशापुर के सभी लोगों और जानवरों को मार दिया गया था।
मंगोल्स ने 1222 में सेंट्रल एशिया पर हमला करना बंद कर दिया था। उन्होंने मुल्तान पर कब्जा कर लिया था, जो मॉडर्न पाकिस्तान का दिल माना जाता है। चंगेज़ ख़ान और भी आगे जाना चाहते थे और भारत पर जीत हासिल करना चाहते थे। लेकिन, मंगोल्स के लिए मौसम एक बड़ी समस्या बन गया था।
इंडियन सबकॉन्टिनेंट एक गर्म और ह्यूमिड इलाका है। यह मंगोल के ड्राई होमलैंड से बहुत अलग है। चंगेज़ ख़ान के कई योद्धा बीमार हो गए थे। नमी से भरी हवा मंगोल तीरंदाज़ों की ताकत पर असर करने लगी थी। इसलिए, मंगोल्स ने अफगानिस्तान लौटने का फैसला किया।
वहाँ से, चंगेज़ ख़ान अपने घर वापस मांगलिया चले गए। उन्हें मंगोल की गद्दी के लिए उत्तराधिकारी चुनने में दिक्कत हो रही थी। उनके दोनों बड़े बेटे, जोची और चगताई, के बीच बहुत दुश्मनी थी।
इन दिक्कतों को संभालते हुए, चंगेज़ ख़ान को 1226 में मजबूरी में युद्ध के लिए जाना पड़ा। उनकी सेना चाइना के तांगुत कबीले के खिलाफ लड़ रही थी। चंगेज़ ख़ान को युद्ध में ज्यादा चोट नहीं लगी थी। तांगुत युद्ध के दौरान जंगली घोड़ों का शिकार करते वक्त वह अपने घोड़े से गिर गए थे।
अब 60 साल के हो चुके चंगेज़ ख़ान कभी इस चोट से उबार नहीं पाए। उन्हें बार-बार बुखार हो रहा था लेकिन उन्होंने अपने घर लौटने से इंकार कर दिया था। वह सबसे आगे रहकर तांगुत अभियान को लीड करते रहे। आखिर में जीत से 6 महीने पहले चंगेज़ ख़ान की मौत हो गई।
Their Golden Light
चंगेज़ ख़ान की मौत के बाद, मंगोल पहले से ज्यादा शांतप्रिय देश बन गया था। अब वो सैनिकों के बजाय फॉरेन जगहों पर स्कॉलर्स और एम्बेसडर्स को भेजते थे। मंगोल्स अभी भी पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करना चाहते थे, लेकिन इस बार उनके टूल ट्रेड और डिप्लोमेसी थे, न की युद्ध।
कुबलई ख़ान के शासन के दौरान यह बदलाव हुआ था। वह चंगेज़ ख़ान के पोते थे। 13th सेंचुरी के बाद से, मंगोल्स पूरे एशिया के ट्रेड रूट को मेंटेन कर रहे थे। उन्होंने हर 30 मिल पर शेल्टर बनाए थे जिसमें खाने का स्टॉक रखा जाता था।
मंगोल्स ने ट्रेड को प्रमोट करने के लिए दुनिया का पहला पासपोर्ट इंट्रोड्यूस किया। पैज़ा (Paiza) एक टैबलेट होता था जिसे ट्रैवलर अपने गले में पहन सकता था। पैज़ा किस मेटल का इस्तेमाल करके बना है और उसके ऊपर बना हुआ सिंबल, उसे पहनने वाले के इंपोर्टेंस को बताता था। कुछ पैज़ा से सिक्योरिटी, ट्रांसपोर्ट और अकॉमोडेशन की गारंटी मिलती थी।
कुबलई ख़ान ने मैप डेवलप करके ट्रैवल करना और भी ज्यादा इंप्रूव कर दिया था। हर एक जीते हुए शहर में मंगोल ऑफिसर मैप ढूंढा करते थे। डिटेल में गाइड बनाने के लिए उन्होंने चाइनीज़, अरब और ग्रीक टेक्नीक्स को एक साथ मिलाकर इस्तेमाल किया था। मंगोल कार्टोग्राफर्स ग्लोब बनाते थे जिसमें वह यूरोप, एशिया, अफ्रीका और यहां तक की पैसिफिक आइलैंड को भी दिखाते थे।
चाइनीज़ कॉलोनी को मंगोल ट्रेड नेटवर्क से सबसे ज्यादा फ़ायदा होता था। चंगेज़ ख़ान के हमलों ने इराक और पर्शिया में मैन्युफैक्चरिंग को बर्बाद कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ की, चाइनीज़ सामान पूरे दुनिया के मार्केट में आने लगे।
मंगोल्स ने चाइनीज़ वर्कशॉप्स को ट्रेडिशनल चाइनीज़ क्राफ्ट से आगे बढ़ा दिया था। बेबी जीसस और मैरी की नक्काशीदार मूर्तियाँ यूरोप में एक्सपोर्ट करने के लिए बनाए जाते थे।
मंगोल्स को यह भी एहसास हो गया था की उन्होंने जितने भी सामान देखे थे, उन सबकी डिमांड थी। जो चीज़ एक देश के लिए नॉर्मल थी वो दूसरे देश में एक्साइटिंग और एग्जॉटिक हो सकती थी। पेपर से लेकर ज़हर से लेकर पिस्ता तक, सब चीजों को मार्केट में बेचा जा सकता था।
इसका सबसे अच्छा example था, फैब्रिक इंडस्ट्री। सेंटिन के कपड़ों को अपना नाम मंगोल के पोर्ट ज़ाय्तुन से मिला है। बारीक पैटर्न वाले डैमस्क सिल्क की शुरुआत डैमैस्कस से हुई थी जो आज के सीरिया में है। मलमल का कोमल कपड़ा इराक के मोसुल शहर से आता था। ये सभी फैब्रिक यानी कपडे यूरोप में बहुत पॉपुलर हो गए थे।
मंगोल एंपायर, अपनी नई संपत्ति को बांटने के तरीके में कुछ यूनिक था। आम एंपायर अपनी संपत्ति को कैपिटल शहर में रखते थे। रोम और बेबीलोन के example को देखें। लेकिन मंगोल्स के पास ऐसा कोई एरिया नहीं था जिसमें ज्यादा संपत्ति दी गई थी। उनके पूरे साम्राज्य में लोग और सामान बंटे हुए थे।
इस तरह, मंगोल एंपायर ने पूरी दुनिया में कई कल्चर को फैलने में मदद की। मंगोल सम्राट, अरब डॉक्टर को चाइना लेकर आते थे और चाइनीज़ दवाइयों को मिडल ईस्ट भेजते थे।
मुस्लिम अच्छे सर्जन थे लेकिन चाइनीज़ लोगों को दवाइयों के बारे में ज्यादा नॉलेज थी। हर कल्चर की ताकत को एक साथ मिलाकर मंगोल्स ने एक बैलेंस्ड मेडिकल सिस्टम बना दिया था।
जितना ज्यादा ट्रेड और ट्रैवल होता था, मंगोल्स के पास प्रोसेस करने के लिए उतनी ज्यादा इनफॉर्मेशन होती थी। वह स्ट्रिक्ट बजट और एग्रीकल्चरल रिकॉर्ड रखने पर भरोसा करते थे। मंगोल्स अपने एंपायर में मौजूद इंसानों, जानवरों और बिल्डिंग्स की भी गिनती करके रखते थे।
चाइनीज़ और यूरोपियन मैथेमेटिक्स ऐसे कामों को हैंडल करने के लिए बहुत बेसिक थे। इसलिए, मंगोल्स इंडियन और अरब मैथमेटिशियंस के एडवांस नॉलेज का इस्तेमाल करते थे। जब ख्वारज़्म पर हमला किया गया था तब वो मैथमेटिकल नॉलेज का सेंटर था। “एल्गोरिथम” शब्द को "अल ख़्वारज़्म" से ही लिया गया है।
मंगोल्स ने कभी यूरोप पर हमला नहीं किया था, इसलिए उन्हें मौत और तबाही की कीमत नहीं चुकानी पड़ी। हालांकि, यूरोपीयंस को मंगोल एंपायर के सारे फायदे मिलते थे। ट्रेड और कल्चरल एक्सचेंज से उन्हें नई नॉलेज, नए म्यूजिक, नए खाने और नए फैब्रिक मिलते थे।
13th सेंचुरी तक, कई यूरोपियन trade इंसानों और जानवरों के लेबर पर डिपेंडेंट थे। मंगोल्स ने एशियन माइनिंग, मिलिंग और मेटल वर्किंग टेक्नोलॉजी की शुरुआत की। यूरोपीयंस ने मंगोल्स से ही हवा और पानी के पावर को इस्तेमाल करना सीखा था। उनका कंस्ट्रक्शन और एग्रीकल्चर इंडस्ट्री बहुत तेज़ी से आगे बढ़ने लगी थी।
मंगोल लोगों के ज़िंदगी जीने के तरीके की वजह से भी यूरोप में सोशल और कल्चरल बदलाव आए। चंगेज़ ख़ान को उन कबीलों में एकता लानी थी जो कई अलग-अलग धर्मों को फॉलो किया करते थे।
इसलिए, मंगोल ही वह पहला एंपायर था जिसमें पूरी तरह से धार्मिक आज़ादी दी गई थी। इसने और इंटरनेशनल लॉ और ह्यूमन राइट्स जैसे आइडिया, यूरोप में पॉपुलर हो गए थे।
Conclusion
सबसे पहले, आपने चंगेज़ ख़ान की शुरुआती ज़िंदगी के बारे में जाना। यंग टेमुजिन, कमज़ोर बोरिजिन कबीले के एक शिकारी का बेटा था। जब उनके पिता की मौत हुई तब टेमुजिन के परिवार को अकेला छोड़ दिया गया था। अपने बड़े भाई, बेग्टर की ह्त्या करने के लिए उन्हें जेल में भी रखा गया। जब टेमुजिन बड़े हो गए तब उन्होंने अपनी फैमिली की सिक्योरिटी के लिए ओंग ख़ान के कबीले को ज्वाइन कर लिया।
दूसरा, आपने जाना की कैसे चंगेज़ ख़ान के मंगोल के कबीलों को एकजुट किया था। ओंग ख़ान के लिए काम करते वक्त, उन्होंने जर्किन , ताइचिउड और टाटर्स पर जीत हासिल की थी। जब ओंग ख़ान ने टेमुजिन की ह्त्या करने की कोशिश तब टेमुजिन ने उनके खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया। ओंग ख़ान की हार के बाद, उन्होंने चंगेज़ ख़ान का टाइटल अपनाया। हारे हुए राज्यों के लोगों को वह एक कॉमन ग्रेट लॉ के अंदर ले आए थे।
तीसरा, आपने जाना की कैसे चंगेज़ ख़ान ने ईस्ट में चाइनीज़ देशों को जीता। उईघुर और तांगुत से लड़कर मंगोल्स ने शहरों को जीतने के बारे में सीखा था। झोंग्डू को जीतने से उन्हें चाइनीज़ ट्रेड और सिल्क रूट के ऊपर कंट्रोल मिल गया था।
चौथा, आपने चंगेज़ ख़ान के मिडल ईस्ट पर हमला करने के बारे में जाना। मंगोल्स बस एक ट्रेड ट्रीटी करना चाहते थे, लेकिन सुल्तान द्वारा किए गए अपमान से चंगेज़ ख़ान युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। मंगोल्स ने अरब देशों को आसानी से हरा दिया था। हालांकि, मौसम की वजह से वह पाकिस्तान और इंडिया की तरफ नहीं बढ़ पाए।
पांचवा, आपने यूरोप और बाकी की दुनिया पर मंगोल एंपायर के प्रभाव के बारे में जाना। उन्होंने चाइनीज़ प्रोडक्ट्स के लिए एक ग्लोबल मार्केट बना दिया था। इससे अलग-अलग कल्चर और नॉलेज सभी सिविलाइजेशंस में शेयर होने लगा। यूरोपीयंस को ईस्टर्न साइंस, टेक्नोलॉजी और फिलोसॉफी की नॉलेज होने लगी थी।
चंगेज़ ख़ान की आदिवासी लाइफस्टाइल को आज बहुत कम लोग ही फॉलो करते हैं, लेकिन बाकी हर चीज में वह अपने समय से बहुत आगे थे। उनके एंपायर ने ही ग्लोबलिज्म और धार्मिक आज़ादी जैसे मॉडर्न कॉन्सेप्ट का फाउंडेशन रखा था।
दुनिया के ज़्यादातर हिस्से में आज भी उसी स्ट्रक्चर को फॉलो किया जाता है जो मंगोल्स ने बनाया था। उनकी हिस्ट्री में हमारे सिविलाइजेशन के फ्यूचर के लिए कई कीमती सबक छुपे हुए हैं।
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